Monday 24th of August 2026

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चंपावत:जनता मिलन में जिलाधिकारी ने फरियादियों की सुनी समस्याएं

बाराकोट:चामी आषाढी मेले का जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया शुभारंभ। निकली भव्य कलश यात्रा।

चंपावत:रीठा साहिब पुलिस की बड़ी कार्यवाही चोरी की 02 मोटरसाइकिलों सहित 02 गिरफ्तार

लोहाघाट:मांगों को लेकर महाविद्यालय की छत में चढ़े छात्र संघ पदाधिकारी। प्रशासन व पुलिस की टीम मौके पर।

लोहाघाट:महाविद्यालय व छात्रों की समस्या को लेकर भूख हड़ताल पर बैठी एबीवीपी व एनएसयूआई।

सूचना

रिपोर्ट:जगदीश जोशी : हल्द्वानी:वन पंचायत को संवैधानिक दर्जा व मानदेय की मांग वन सरपंचों का विशाल प्रदर्शन।

Laxman Singh Bisht

Mon, Aug 24, 2026

वन पंचायत को संवैधानिक दर्जा व मानदेय की मांग वन सरपंचों का विशाल प्रदर्शन।

मांगों को लेकर कुमाऊं कमिश्नर को दिया ज्ञापन।

वन पंचायतो को संवैधानिक दर्जा व मानदेय की मांग को लेकर जिले भर के सरपंचों ने हल्द्वानी में विशाल प्रदर्शन के साथ जिलाधिकारी नैनीताल व कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को ज्ञापन दिया ।चंपावत के जिले भर के समस्त सरपंचों द्वारा प्रदेश सरपंच संगठन व वन पंचायत परामर्श दात्री समिति कुमाऊं मंडल ने प्रदेश की वन पंचायत को संवैधानिक दर्जा मानदेय और पूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता के संबंध में मांग उठाई थी, समिति का कहना था उत्तराखंड की 11217 वन पंचायत वर्ष 1931 से वन संरक्षण का कार्य कर रही है, लेकिन आज भी उन्हें पर्याप्त अधिकार व मानदेय नहीं मिल रहा है, समिति के अनुसार वन पंचायत जंगल, जल, और जैव विविधता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है इसके बावजूद शासन प्रशासन की अपेक्षा के कारण वनअग्नि समेत अन्य कार्य से प्रदेश को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, मांगों को लेकर वन पंचायत सरपंचों ने 22 अगस्त को हल्द्वानी में प्रदर्शन कर जिला अधिकारी कार्यालय से आयुक्त कुमाऊं मंडल कार्यालय तक रैली निकाली गई समिति ने सरपंचों के लिए ₹3500 प्रति माह व पंचों को ₹500 प्रतिमाह मानदेय स्वीकृत करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया जिसमें चंपावत के सरपंचों द्वारा अपनी मांग को लेकर, जिला अध्यक्ष दान सिंह कठायत की अध्यक्षता में जिले भर के सरपंचों का एक शिस्ट मंडल सरपंचों के अधिकारों व ग्राम पंचायत के हक हकूक को खत्म करने विशेष कर उत्तराखंड राज्य जल, जंगल, जमीन के हकों के लिए बनाया गया था लेकिन राज्य सरकार ने 2005/ 2001 नियमावली पूर्ण रूप से जन विरोधी बनाई गई बार-बार संशोधन करने के बावजूद भी ग्राम वासियों के हक हकूक नहीं दिए गए, 1931 के सरपंच को मानदेय ही नहीं दिया गया, नाहीं स्टेशनरी खर्चा, यात्रा भत्ता, दिया गया मुफ्त की जिम्मेदारी लाद दी गई, आजादी के पूर्व का जनप्रतिनिधि लाचार व विवश है, इस दूरदर्शा का जिम्मेदार कौन , सरपंचों में लगातार वन विभाग हाबी होता जा रहा है उसे हर प्रकार के अधिकारो से वंचित किया जाता हैं पूरे उत्तराखंड में 11217 वन पंचायते कार्य कर रही है एक वन पंचायत में सरपंच सहित 9 पंच होते हैं कुल मिलाकर दस सदस्यों को अगर 11217 गुणा किया जाता है तो पूरे, उत्तराखंड में 112170 सरपंच व पंच है जो कि सरकार बदलने के लिए काफी है।

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