रिपोर्ट: जगदीश जोशी : लोहाघाट:फोर्ती मे किसानो की सुरक्षा कवच बनी 990 मीटर चैनलिंक फेंसिंग,
Laxman Singh Bisht
फोर्ती मे किसानो की सुरक्षा कवच बनी 990 मीटर चैनलिंक फेंसिंग,

मुख्यमंत्री के विजन से कृषि में लौटा उत्साह, रुकेगा पलायन*
सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी की मिसाल बना ग्राम फौर्ती
जनभागीदारी और राजकीय सहायता से बदला खेती का मंजर

उत्तराखंड के जनपद चम्पावत के लोहाघाट विकासखंड के ' फोर्ती' गांव आज प्रदेश में सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की एक अद्भुत मिसाल बनकर उभरा है। घने जंगलों से घिरे इस गाँव के किसानों के लिए जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती थी, जिसके कारण कृषि से किसानों का मोहभंग हो रहा था और लोग पलायन के लिए विवश हो रहे थे। कृषि विभाग, जनपद चम्पावत ने जिला योजना के अंतर्गत पहल करते हुए किसानों को 990 मीटर 'चैनलिंक फेंसिंग' सामग्री उपलब्ध कराई, जिसे शत-प्रतिशत राजकीय सहायता और ग्रामीणों के अभूतपूर्व श्रमदान से स्थापित किया गया। इस अभेद्य सुरक्षा दीवार के बनते ही जंगली जानवरों का खतरा समाप्त हो गया और किसानों में पुनः अपनी भूमि पर लहलहाती फसलें उगाने का नया उत्साह जग उठा है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'समृद्ध किसान, सशक्त उत्तराखंड' के दूरदर्शी संकल्प को यह सफलता धरातल पर साकार करती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जब तक हमारे सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों के किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक प्रदेश का समग्र विकास अधूरा रहेगा। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य नवीन कृषि तकनीकों, शत-प्रतिशत सुरक्षा उपायों और बहुमूल्य नकदी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय को दुगना करना है। गाँव-गाँव तक योजनाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित करके और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा का पक्का ढांचा तैयार करके सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।ग्राम फोर्ती में निर्मित यह चैनलिंक बाड़ केवल लोहे और तारों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गाँव के सुनहरे भविष्य की सुरक्षा रेखा है। आज फौर्ती के किसान बेखौफ होकर सब्जी, शिमला मिर्च और आडू जैसी नकदी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी उपज और आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में कृषि विभाग और जनभागीदारी का यह सफल मॉडल राज्य के अन्य सभी वन-सीमांत गाँवों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है, जो यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों से कठिन से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को बदलते हुए खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
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