रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : कठिनाइयों को हराकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं गीता पंत ग्राम सेलपेडू की साधारण गृहिणी बनीं सशक्त उद्यमी
Laxman Singh Bisht
Sun, Jul 13, 2025
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिली दिशा, ब्यूटी पार्लर और सिलाई उद्यम ने बदली जिंदगी
विकास खण्ड लोहाघाट के एक छोटे से गाँव सेलपेडू की रहने वाली गीता पंत आज आत्मनिर्भरता की एक जीवंत मिसाल हैं। कभी एक सामान्य गृहिणी रही गीता देवी की जिंदगी परिवार के साथ सादगी से व्यतीत हो रही थी। लेकिन मात्र 40 वर्ष की आयु में उनके पति का असमय निधन हो गया, जिससे उनके जीवन की दिशा ही बदल गई।अचानक पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई – बच्चों की परवरिश, घर का खर्च और सामाजिक दबाव जैसी चुनौतियाँ एकसाथ सामने खड़ी थीं।इस कठिन परिस्थिति में जहाँ बहुत से लोग टूट जाते हैं, वहीं गीता पंत ने हिम्मत और आत्मबल से हालात का सामना किया। उन्होंने हार मानने के बजाय ब्यूटी पार्लर और सिलाई कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। यह फैसला आसान नहीं था – संसाधनों की कमी, अनुभव की चुनौती और ग्रामीण परिवेश में एक महिला का उद्यम शुरू करना किसी संघर्ष से कम नहीं था, लेकिन उनके भीतर आगे बढ़ने की जिद और आत्मनिर्भर बनने की ललक थी।इसी दौरान गीता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से परिचित हुईं, और उन्होंने इसके अंतर्गत गठित ‘प्रगति स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने व्यवसाय को मजबूती देने का सपना देखा। इस दिशा में पहला ठोस कदम तब उठा जब उन्होंने ग्राम संगठन से ₹1,50,000 का ऋण प्राप्त किया और साथ ही ₹50,000 अपनी जमा पूंजी से जोड़कर कुल ₹2 लाख की राशि से अपने उद्यम को विस्तार दिया।इस निवेश से गीता ने अपने ब्यूटी पार्लर में नई मशीनें, कॉस्मेटिक उत्पाद, हेयर और स्किन केयर सामग्री शामिल की। साथ ही उन्होंने अपनी सिलाई दुकान में लेडीज गारमेंट्स, फैब्रिक्स, ड्रेस मटीरियल और रेडीमेड कपड़ों का भी स्टॉक बढ़ाया। यह बदलाव उनके उद्यम के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। धीरे-धीरे उनकी सेवाओं की सराहना होने लगी और ग्राहक आधार बढ़ने लगा।आज गीता पंत हर महीने ₹10,000 से ₹12,000 तक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। उनकी दुकान अब न केवल आय का माध्यम है, बल्कि उनके आत्मसम्मान, सामाजिक पहचान और प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है। उनका कहना है, “राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद मुझे नया जीवन मिला। यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं देती, बल्कि आत्मबल भी देती है। अब मेरा लक्ष्य है कि मैं अपने व्यवसाय को एक बड़ा ब्यूटी एंड बुटीक सेंटर बनाऊं और अन्य महिलाओं को भी जोड़ूं।”ग्राम सेलपेडू की यह साधारण महिला आज असाधारण प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके संघर्ष, संकल्प और सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि महिला को सही अवसर, समर्थन और मार्गदर्शन मिले, तो वह न केवल अपने जीवन की दिशा बदल सकती है, बल्कि दूसरों के लिए भी उम्मीद की किरण बन सकती है। गीता की सफलता से प्रेरित होकर गाँव की अन्य महिलाएं भी अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने लगी हैं और अपने जीवन को बदलने की दिशा में कदम उठा रही हैं।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत इस प्रकार के समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह योजना उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, और आत्मनिर्भरता की ओर मार्गदर्शन देती है।