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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:अवकाश के बावजूद भी लोक निर्माण विभाग कार्यालय में धरने में डटे रहे चेतराम। सोमवार से आमरण अनशन की चेतावनी।

Laxman Singh Bisht

Thu, May 28, 2026

अवकाश के बावजूद भी लोक निर्माण विभाग कार्यालय में धरने में डटे रहे चेतराम।

सोमवार से आमरण अनशन की चेतावनी।

लोहाघाट।अपनी मांगों को लेकर लोहाघाट लोक निर्माण विभाग कार्यालय में धरना दे रहे चेतराम आज बकरीद की छुट्टी होने के बावजूद भी लोक निर्माण विभाग कार्यालय लोहाघाट में धरने में डटे रहे। आज उनके धरने को तीसरा दिन है। बुजुर्ग चेतराम ने चेतावनी देते हुए कहा अगर रविवार तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो सोमवार से वह आमरण अनशन शुरू कर देंगे। मांगों को लेकर चेतराम के द्वारा अपनी मांगों को लेकर 116 वीं बार धरना दिया जा रहा है। बुजुर्ग चेतराम ने कहा वह लगभग 33 वर्षों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे पर हर बार उन्हें प्रशासन व विभाग से आश्वासन मिले पर मांग पूरी नहीं हुई।

उन्होंने कहा वर्ष 1993 में लोक निर्माण विभाग लोहाघाट के द्वारा उन्हें मस्टरोल के तहत राजमिस्त्री के पद पर रखा गया था तथा वर्ष 1995 में लोहाघाट महाविद्यालय निर्माण के दौरान वह निर्माणाधीन भवन की छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे उनकी किडनी भी डैमेज हो गई थी। जिसे हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में ऑपरेशन कर निकाल गया। पर विभाग के द्वारा उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया जबकि इलाज में उनका 6 लाख 18 हजार रुपए खर्च हो चुका है तथा तीन नाली भूमि उनके द्वारा गिरवी रखी गई है और वह अभी भी कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित है जिसका उपचार चल रहा है। चेतराम ने कहा जब तक उनके बेटे को नौकरी व उनका इलाज में आया खर्च 6लाख 18 हजार रुपया उन्हें नहीं दिया जाता है उनका धरना लगातार जारी रहेगा। कहा उन्हें बार-बार आश्वासन दिया गया पर मुआवजा नहीं। चेतराम ने कहा मांगे ना माने जाने पर वह बिना किसी को बताया आत्महत्या भी कर सकते है। कहा अगर अनशन के दौरान उन्हें कुछ भी होता है उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की होगी। कहा जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है उनका आंदोलन जारी रहेगा। वही लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हितेश कांडपाल ने बताया चेतराम को कर्मकार प्रतिकार आयुक्त एवं उप श्रमा युक्त हल्द्वानी जिला नैनीताल के निर्देश पर वर्ष 22 अगस्त 2001 को 34688 रुपया भुगतान देने के निर्देश दिए गए थे जो उन्हें पूर्व दिया जा चुका है। तथा उनके द्वारा हाई कोर्ट में लगाई गई अर्जी को खारिज किया जा चुका है। वही चेतराम का कहना है जो उन्हें 34688 रुपए की धनराशि दी गई थी वह उनके द्वारा किए गए कार्य की धनराशि थी विभाग उन्हें गुमराह कर रहा है। हाई कोर्ट के फैसले की उन्हें जानकारी नहीं है। फिलहाल चेतराम 116 वी बार धरने में जमे हुए हैं। अब देखना है आगे क्या होता है चेतराम की मांगे पूरी होती है या फिर से आश्वासन मिलते हैं?

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