रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:सार्थक संवाद और नए निष्कर्षों के साथ शिक्षाविदों का समागम हुआ सम्पन्न।
सार्थक संवाद और नए निष्कर्षों के साथ शिक्षाविदों का समागम हुआ सम्पन्न।
डायट लोहाघाट के राष्ट्रीय सेमिनार के समापन में गूँजा मूल्य आधारित शिक्षा का संदेश।
चंपावत। डायट लोहाघाट में संपन्न हुए ऐतिहासिक सेमिनार में संगोष्ठी के विषय “शिक्षा के बदलते परिदृश्य एवं नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता” के समापन सत्र में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथिगणों ने इस राष्ट्रीय आयोजन को क्षेत्र के लिए एक विशेष अवसर बताया। पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के प्रतिनिधि थानाध्यक्ष अशोक कुमार सहित समस्त अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समाज को एक नई दिशा और दशा प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय सेमिनार ऑनलाइन तथा ऑफलाइन हाइब्रिड मोड में संचालित की गई, जिसमें 350 से अधिक शोधपत्र प्राप्त हुए हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में 100 से अधिक प्रोफेसर, शोधार्थी और शिक्षकों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम का संचालन कन्वेनर डॉ लक्ष्मी शंकर यादव तथा को कन्वेनर प्रकाश चन्द्र उपाध्याय एवं योगिता पंत ने किया। द्वितीय दिवस में प्रभारी प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल तथा अन्य संकाय सदस्यों की अध्यक्षता में देशभर के प्रमुख प्रख्यात शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत किए। समस्त शोध पत्र प्रस्तुतकर्ताओं, शोधार्थियों तथा प्रतिभागियों को जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी एवं अन्य अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ लक्ष्मी शंकर यादव ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन निश्चित तौर पर आम जनमानस तथा छात्र छात्राओं में नैतिक मूल्यों का विकास करेंगे। को कन्वेनर डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। को कन्वेनर एवं संचालक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन शिक्षा की दिशा और दशा को परिवर्तित करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्राचार्य मान सिंह, दिनेश सिंह खेतवाल, को कन्वेनर डॉ आशुतोष वर्मा, डॉ अनिल कुमार मिश्रा, डॉ पारुल शर्मा, दीपक सोराडी, डॉ अवनीश कुमार शर्मा, कृष्ण सिंह ऐरी, मनोज भाकुनी, नवीन उपाध्याय, डॉ कमल गहतोड़ी, राम बालक मिश्रा, अखिलेश श्रीवास्तव, डॉ नवीन जोशी ने आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। अभिलेखीकरण एवं अन्य व्यवस्थाओं में राखी गहतोड़ी, जानकी चतुर्वेदी, रज्जन कफल्टिया, पूनम त्रिपाठी, हेमा जोशी, नरेश जोशी, गिरीश चंद्र जोशी,भुवन चंद्र दुमका, मधु कलौनी, रीता पाण्डे सहित समस्त डीएलएड प्रशिक्षुओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।