रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:मास्टर प्लान के प्रारूप का प्रकाशन: व्यवस्थित विकास, नजूल नीति और जनभागीदारी पर प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट
Laxman Singh Bisht
Thu, Jul 23, 2026
मास्टर प्लान के प्रारूप का प्रकाशन: व्यवस्थित विकास, नजूल नीति और जनभागीदारी पर प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट
आदर्श चम्पावत की परिकल्पना होगी साकार: जिलाधिकारी ने मास्टर प्लान-2041 और नजूल भूमि पर स्थिति की स्पष्ट, नागरिकों से मांगे लिखित सुझाव
जिलाधिकारी ने महायोजना के लिए सभी नागरिकों से की अपने सुझाव लिखित रूप में उपलब्ध कराने की अपील

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की "आदर्श चम्पावत–विकसित चम्पावत" की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में जनपद चम्पावत के मास्टर प्लान-2041 के प्रारूप पर एवं नजूल भूमि पर स्थिति विस्तृत जानकारी देते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जनपद के व्यवस्थित विकास, महायोजना (मास्टर प्लान) के प्रारूप तथा नजूल भूमि को लेकर उत्पन्न संशयों पर प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की है।उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष विचाराधीन प्रकरणों में न्यायालय के निर्देशों, आदेशों तथा शासन की स्थापित नीतियों के अनुरूप ही नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि नजूल भूमि और महायोजना दो पूरी तरह से पृथक विषय हैं। नजूल भूमि वस्तुतः राज्य सरकार के स्वामित्व वाली एक विशिष्ट श्रेणी की भूमि है, जिसका नियमन एवं विनियमन भू-राजस्व नियमों और राज्य सरकार की निर्धारित नीतियों के अधीन होता है। नजूल भूमि पर नागरिकों के अधिकारों को परिपक्व करने अथवा हस्तांतरित करने की प्रक्रिया नजूल नीति के तहत ही संपादित की जाती है। पूर्व में इस संबंध में स्थानीय नागरिकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया गया था, जहां यह प्रकरण वर्तमान में विचाराधीन है और राज्य सरकार इस पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही है।वहीं दूसरी ओर, महायोजना का प्राथमिक उद्देश्य भूमि के प्रकार से परे संपूर्ण क्षेत्र का एक नियमित, संतुलित और व्यवस्थित विकास (Regulated Development) सुनिश्चित करना है। इस योजना से किसी नागरिक के पूर्व से स्थापित भूमि अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और जिनके अधिकार परिपक्व हैं, वे नियमानुसार अपनी गतिविधियों को निरंतर जारी रख सकेंगे। महायोजना के अंतर्गत समाज के सभी वर्गों—विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों—की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुगम रास्तों, पार्कों, सुचारु पार्किंग, व्यवस्थित सड़कों, जलनिकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था तथा थाने व विद्युत पोल जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए स्थल पूर्व-निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नागरिकों को आवासीय निर्माण में सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से लगभग 300 से 400 मानक आर्किटेक्चरल नक्शे भी संदर्भ हेतु उपलब्ध कराए गए हैं।यह संपूर्ण महायोजना पूर्णतः जनभागीदारी पर आधारित है। प्रथम चरण में इस प्रारूप को तहसील, ब्लॉक तथा नगर पालिका कार्यालयों में नागरिकों के अवलोकन हेतु प्रदर्शित किया गया है, साथ ही विशेषज्ञ टीम गांव-गांव जाकर भी आम जनता के सुझावों का संकलन कर रही है। क्षेत्रीय नागरिक 31 जुलाई तक अपने सुझाव व परामर्श दर्ज करा सकते हैं। आम जनता की आकांक्षाओं और सुझावों को समाहित करने के उपरांत ही महायोजना को अंतिम रूप देकर अगले चरण में कार्यान्वित किया जाएगा।