Tuesday 7th of July 2026

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : चंपावत:ग्राम प्रधान बकोड़ा की मां को उपचार के लिए 6 किलोमीटर डोली के सहारे ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल

Laxman Singh Bisht

Wed, Aug 13, 2025

सड़क न होने का खामियाजा भुगत रहे हैं ग्रामीण। मुख्यमंत्री की विधानसभा में मरीजो के लिए ग्रामीणों के कंधे व डोली बनी एम्बुलेंस।

कल भी 15 किलोमीटर पैदल चल मंच लाए थे मरीज को ग्रामीण।आदर्श चंपावत जिले के तल्लादेश क्षेत्र के बकोड़ा ग्राम सभा में सड़क न होने का खामियाजा ग्रामीण आए दिन भुगत रहे हैं ।कल 12 अगस्त को बकोड़ा के ग्रामीण बीमार कलावती देवी को 15 किलोमीटर एक डंडे के सहारे मंच तक लाए थे। तो वही आज 13 अगस्त को बकोड़ा के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह रावत की मां मुन्नी देवी (55)को ग्रामीण एक डंडे के सहारे डोली बनाकर कंधों में लाद कर बकोड़ा से 6 किलोमीटर पैदल चल सीम लाए जहां से ग्रामीणों ने नदी पार कर चूका पहुंचाया फ़िर उन्हें वाहन से 35 किलोमीटर दूर टनकपुर अस्पताल पहुंचाया। ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह रावत ने बताया मेरी माता जी पर तीन दिन पूर्व बेल ने हमला कर घायल कर दिया था।जिन्हें आज डंडे की डोली बनाकर बारिश के बीच 6 किलोमीटर पैदल चल ग्रामीणों के द्वारा सीम पहुंचाया गया जहां किसी तरह नदी पार करने के बाद उन्हें टनकपुर अस्पताल पहुंचाया गया। बकोड़ा के बीमार बुजुर्गों के लिए ग्रामीणों के कंधे और डोली एंबुलेंस का काम कर रही है। ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह रावत ने कहा कई बार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से बकोड़ा के लिए सड़क बनाने की मांग की गई पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। रावत ने कहा संबंधित विभागों के द्वारा वन विभाग की आपत्ति लगने की बात कहकर मामले को हर बार ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कहा सड़क न होने का खामियाजा ग्रामीण आए दिन इसी तरह भुगत रहे है। जहां गांव के बच्चों को आठवीं के बाद मंच स्कूल जाने के लिए 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है जिसके लिए बच्चों को सुबह 5:00 बजे स्कूल जाने के लिए तैयार होना पड़ता है तथा मरीजों को भी टनकपुर ले जाने के लिए 6 किलोमीटर तथा मंच लाने के लिए 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा तथा मंच के बाद चंपावत जिला अस्पताल लाने के लिए 35 किलोमीटर की वाहन के द्वारा यात्रा करनी पड़ती है। मंच ग्राम प्रधान रावत ने अपने विधायक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व जिला प्रशासन से गांव के लिए सड़क बनाने की मांग की ।कहा देश चांद पर पहुंच चुका है पर उनके गांव वासियों के लिए सड़क एक सपना जैसा बना हुआ है। ग्रामीण गांव में सड़क आने के सपने तो देखते हैं पर सरकार और उनके नियमों के कारण उनका यह सपना आजादी के 76 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। आए दिन गांव के बीमार बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं को ग्रामीणों के द्वारा डोली के सहारे अस्पताल लाना पड़ता है कहा मेरे गांव के ग्रामीणों के लिए सरकार के द्वारा न तो चिकित्सा न शिक्षा और न सड़क सुविधा दी गई है जबकि हम मुख्यमंत्री जी की विधानसभा के निवासी हैं। धन्य है बकोड़ा के वह ग्रामीण व युवा जो मरीजो को उबड़ खाबड़ व खतरनाक रास्तों से उनकी जान बचाने के लिए अस्पताल पहुंचाते हैं। डोली में पहुंचाने में जगदीश रावत ,प्रियांशु ,आरुष और कमलेश आदि शामिल रहे।

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