Tuesday 7th of July 2026

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चंपावत:ग्राम पंचायतों के उप प्रधान पदों हेतु सामान्य निर्वाचन कार्यक्रम घोषित; 15 जुलाई को ही होगा नामांकन, मतदान और

लोहाघाट:जू0 हा0 फोर्ती में मुख्यमंत्री ज्ञान केंद्र का जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया शुभारंभ।

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : चंपावत:फ़ेसबुक में बग़ैर जानकारी के लोग बन रहे हैं भेड़ चाल के शिकार-शशांक पाण्डेय

Laxman Singh Bisht

Tue, Aug 12, 2025

फ़ेसबुक में बग़ैर जानकारी के लोग बन रहे हैं भेड़ चाल के शिकार-शशांक पाण्डेयहाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक बार फिर एक पुराना और भ्रामक संदेश तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि फेसबुक या मेटा के “नए नियम” लागू होने वाले हैं और अगर यूज़र ने तुरंत एक खास तरह का स्टेटस कॉपी-पेस्ट करके अपने प्रोफाइल पर नहीं डाला, तो उसकी सभी निजी तस्वीरें, पोस्ट और जानकारी कंपनी के अधिकार में चली जाएंगी। संदेश में एक चेतावनी जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें तारीख़ और समय की सीमा तय कर दी जाती है—मानो आधी रात के बाद आपकी गोपनीयता खत्म हो जाएगी। कई जगह यह भी लिखा जाता है कि “टीवी पर प्रसारित हुआ है” या “यह पूरी तरह आधिकारिक सूचना है” ताकि इसे और विश्वसनीय दिखाया जा सके।संदेश का प्रारूप हमेशा लगभग एक जैसा होता है—“मैं, (आपका नाम), मेटा/फेसबुक को अपनी निजी जानकारी, तस्वीरें, संदेश और पोस्ट का किसी भी तरह उपयोग करने की अनुमति नहीं देता। इस पोस्ट को शेयर करने से मैं अपने अधिकार सुरक्षित रखता हूँ।” इसे पढ़कर कई लोग तुरंत डर जाते हैं और बिना कुछ सोचे-समझे इसे कॉपी-पेस्ट कर देते हैं। सोशल मीडिया के इतिहास में ऐसे झूठे नोटिस बार-बार अलग-अलग शब्दों और डिज़ाइन में लौटते रहते हैं, लेकिन उनका मूल उद्देश्य यूज़र में भ्रम और डर पैदा करना ही होता है।हकीकत यह है कि इस तरह की कोई भी घोषणा आपके फेसबुक या मेटा के साथ कानूनी संबंधों में कोई बदलाव नहीं करती। प्लेटफ़ॉर्म पर आप जो भी सामग्री डालते हैं, उसका स्वामित्व आपके पास ही रहता है, लेकिन सेवा का उपयोग करते समय आप मेटा को उसे प्रदर्शित करने, साझा करने और सुरक्षित रखने का एक सीमित लाइसेंस देते हैं। यह लाइसेंस और सभी गोपनीयता संबंधी शर्तें केवल कंपनी की आधिकारिक नीतियों और सेटिंग्स से तय होती हैं, न कि आपके प्रोफाइल पर लिखी किसी पोस्ट से। यानी आप चाहे दस बार भी ऐसा स्टेटस लिख दें, उससे प्लेटफ़ॉर्म की नीति में एक शब्द भी नहीं बदलेगा।ऐसे संदेश फैलने की मुख्य वजह लोगों में डिजिटल नियमों की जानकारी का अभाव और ऑनलाइन अफवाहों पर जल्द विश्वास करना है। जब किसी पोस्ट में आधिकारिक दिखने वाले शब्द, कानूनी भाषा और टीवी का हवाला जोड़ दिया जाता है, तो आम यूज़र को लगता है कि यह सच होगा और वह इसे अपने दोस्तों और परिवार को भेज देता है। इस तरह यह झूठी सूचना तेजी से वायरल हो जाती है।वास्तविक डेटा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि आप अपने फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया अकाउंट की सेटिंग्स में जाकर गोपनीयता विकल्पों को अपनी सुविधा के अनुसार सेट करें, जैसे कि कौन आपकी पोस्ट देख सकता है, आपकी प्रोफाइल तस्वीर का इस्तेमाल कौन कर सकता है, और कौन आपको टैग कर सकता है। किसी भी नई नीति या बदलाव के बारे में जानकारी पाने के लिए कंपनी के आधिकारिक पेज या वेबसाइट पर नज़र रखें।याद रखें, आपकी निजता की रक्षा किसी फर्जी नोटिस को कॉपी-पेस्ट करने से नहीं, बल्कि सही सेटिंग्स, सतर्कता और डिजिटल साक्षरता से होती है। बिना जांच-पड़ताल किए किसी संदेश को शेयर करना न केवल आपको बल्कि आपके परिचितों को भी गलत सूचना के जाल में फंसा सकता है। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें, चाहे वे कितनी भी “विश्वसनीय” क्यों न दिखें, अक्सर महज एक धोखा होती हैं—और उनका सबसे असरदार इलाज है जागरूकता।

(लेखक लोहाघाट निवासी हैं और सोशल मीडिया में डिजिटल क्रिएटर है)

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