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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:चार साल बाद भी कागज़ों में कैद डिग्री कॉलेज, लधियाघाटी के युवाओं का भविष्य अधर में।

Laxman Singh Bisht

Wed, Jan 7, 2026

चार साल बाद भी कागज़ों में कैद डिग्री कॉलेज, लधियाघाटी के युवाओं का भविष्य अधर में।घोषणाएं हुईं, बैठकों के आश्वासन मिले, ज़मीन नहीं मिली—कब मिलेगा शिक्षा का अधिकार ?

लोहाघाट। विधानसभा क्षेत्र की लधियाघाटी आज भी उच्च शिक्षा के लिए तरस रही है। सरकार द्वारा चार वर्ष पूर्व डिग्री कॉलेज की घोषणा किए जाने के बावजूद यह योजना आज तक केवल फाइलों और आश्वासनों में सिमटी हुई है। उपयुक्त भूमि के अभाव का हवाला देकर क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं के भविष्य को अधर में छोड़ दिया गया है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि डिग्री कॉलेज न होने से छात्र–छात्राओं, विशेषकर बेटियों को या तो दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है या फिर आर्थिक व सामाजिक कारणों से शिक्षा अधूरी छोड़नी पड़ती है। यह स्थिति सरकार के ‘बेटी पढ़ाओ–बेटी बचाओ’ जैसे नारों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। इस मामले में जनप्रतिनिधियों को भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है कि यदि अब भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो लधियाघाटी की पूरी पीढ़ी शिक्षा से वंचित रह जाएगी। पत्र में केंद्र बिंदु बिरगाड़ा में सभी जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाकर तत्काल समाधान निकालने की मांग की गई है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर चुनाव में शिक्षा को मुद्दा बनाया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही घोषणाएं ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। चार साल का लंबा इंतजार इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की शिक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।अब सवाल यह है कि क्या लधियाघाटी के युवाओं को उनका हक मिलेगा, या फिर डिग्री कॉलेज की यह घोषणा भी अन्य अधूरी योजनाओं की तरह इतिहास बनकर रह जाएगी ? क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं रिटायर्ड शिक्षक चन्द्र शेखर जोशी उर्फ गुरु जी का कहना है कि हमने तो जैसे तैसे अपना जीवन काट लिया है हम जितेजी नई पीढ़ी के लिए इन आंखों से डिग्री कॉलेज खुलता देख जाए तो निश्चित तौर पर हमारी उम्र बढ़ जाएगी।

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