रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : चंपावत:फुरक्याझाला में उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचना बच्चों की मजबूरी चंपावत का बोलता विकास। दुपट्टा बना सहारा
Laxman Singh Bisht
Sun, Aug 10, 2025
जरा सी चूक जानलेवा हो सकती साबित सर में बस्ता रख दुपट्टे से एक दूसरे को बाध कर पार कर रहे हैं नदी।
घोषणा के बावजूद नहीं बना पुल बरसात में ग्रामीणों की बड़ी मुसीबत । ट्रॉली पड़ी है खराब।
ग्रामीणों की अपने विधायक व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से झूला पुल निर्माण की मांग।
बच्चों के नदी पार करने के दौरान मां बाप की बढ़ जाती है धड़कने ।
चंपावत जिले के दुर्गम क्षेत्र फुरक्याझाला से एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें स्कूल जाने के लिए छात्र-छात्राएं अपनी जान को हथेली में रख दुपट्टे से एक दूसरे को बाध कर उफनती लधिया नदी को पार करते हुए नजर आ रहे हैं। नदी मे झूला पुल न होने तथा ट्राली खराब होने से स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करना उनकी मजबूरी बन चुकी है। उफनती नदी को पार करने दौरान जरा सा चूक जान लेवा सकती है। पर पढ़ाई के लिए बच्चे हर मुसीबत से लड़ने को तैयार हैं प्रशासन प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है।क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से झूला पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं वर्ष 2018 में पुल निर्माण की मंजूरी मिलने के बावजूद ग्रामीणों की मांग आज तक अधूरी है।
बच्चों का सर में बैग रखकर यूनिफॉर्म खोलकर एक दूसरे को दुपट्टे से बाध कर उफनती लधिया को पार करना मजबूरी बन चुकी है पर शासन प्रशासन को वर्षों से यह नजर नहीं आ रहा है कि किसी भी समय कोई बड़ी घटना बच्चों व ग्रामीणों के साथ घट सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2018 में झूला पुल निर्माण को मंजूरी मिली थी पर आज तक निर्माण नहीं हुआ उद्यान विभाग के द्वारा लगाई गई ट्रॉली खराब पड़ी है उसे सही नहीं किया गया जिस कारण स्कूली बच्चों को जान हथेली में रखकर यूनिफॉर्म खोलकर नदी पार पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा दुर्गम क्षेत्र में रहने के कारण उनका जीवन काफी कठिनाइयो भरा रहता है शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियो के द्वारा कोई सुध नहीं ली जाती है जबकि कई बार मांग की जा चुकी है।ग्रामीणों ने अपने विधायक व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिलाधिकारी चंपावत से जल्द झूला पुल निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा पुल निर्माण होने तक कम से कम ट्राली को ठीक किया जाए ताकि बच्चों को ग्रामीणों को उफनती नदी पार न करनी पड़े।
ग्रामीणों ने कहा बरसात में नदी के ज्यादा चढ़ने पर कई कई दिनों तक उन्हें घरों में कैद रहना पड़ता है। तो वही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक फुरक्याझाला पुल निर्माण के लिए बनाई गई डीपीआर शासन के द्वारा वापस कर दी गई है तथा विश्व बैंक को आप इसकी जिम्मेदारी दी गई है जहां से अभी तक स्वीकृत नहीं मिल पाई है। स्वीकृति मिलते ही पल का निर्माण किया जाएगा। अब देखना है कब तक इसकी स्वीकृति मिलती है और कब ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो पता है फिलहाल मामले में घोषणा हुए 6 साल बीत चुके हैं। ग्रामीणों की समस्या का समाधान न होने पर ग्रामीण 2027 विधानसभा चुनाव में बड़ा कदम उठा सकते हैं।