रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:किसान ही सबसे बड़ा वैज्ञानिक” पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर जोर - सीडीओ
Laxman Singh Bisht
Thu, Feb 12, 2026
किसान ही सबसे बड़ा वैज्ञानिक” पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर जोर - सीडीओ
ब्लाक सभागार में आयोजित कृषक गोष्ठी में 27 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, सिंचाई, मंडी, बीज और जंगली जानवरों की समस्या प्रमुख मुद्दे रहे।
लोहाघाट। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला है। “किसान मिट्टी में खेलते हुए ऐसा ज्ञान अर्जित करता है, जिसे विज्ञान भी स्वीकार करता है।” यह बात कृषक गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती ने व्यक्त किए। प्रगतिशील किसान नरेश करायत की अध्यक्षता एवं आकांक्षा सिंह के संचालक में हुई गोष्ठी में किसानों ने खेती के क्षेत्र में आ रही विभिन्न चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। सिंचाई सुविधाओं का अभाव, कृषि से जुड़े विभागों का किसानों से सीधा संवाद न होना, मंडियों में उचित मूल्य न मिलना, जंगली जानवरों का आतंक, समय पर उन्नत बीज व खाद न मिलना जैसी समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई। किसानों की ओर से सीडीओ को 27 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। इसमें इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा देने, बेल वाली सब्जियों के लिए लोहे की जालियां उपलब्ध कराने, कृषि भूमि की बिक्री पर रोक लगाने, एप्पल मिशन के अंतर्गत हेलनेट उपलब्ध कराने, पॉलीहाउस समय से लगाने, प्रत्येक किसान को मौन पालन से जोड़ने, जिले में मौन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने तथा कृषि व उद्यान विभाग के कर्मचारियों को मौन पालन प्रशिक्षण देने की मांग शामिल रही।
इसके अतिरिक्त उच्च गुणवत्ता वाले बीज व अन्य सामग्री समय पर उपलब्ध कराने, लोहाघाट में सब्जी मंडी तथा हल्द्वानी में फूल मंडी की व्यवस्था, पशुओं की नस्ल सुधार, दूध के मूल्य में वृद्धि, लंपी वायरस से मृत पशुओं का मुआवजा, लाल चावल, मढुंवा का प्रक्षेत्र विस्तार, जहां पानी उपलब्ध है वहां मछली व मुर्गी पालन को प्रोत्साहन तथा टपक सिंचाई योजना लागू करने की भी मांग उठी। किसानों ने गौशालाओं के निर्माण, व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सीधा संवाद, कृत्रिम गर्भाधान में सुधार, दवाइयों की उपलब्धता तथा मक्का , जैई का बीज व अन्य कृषि सामग्री की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी आय दोगुनी करने के लिए प्रत्येक सुझाव को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने चम्पावत जिले में कृषि व बागवानी की अपार संभावनाएं बताते हुए गुलाब, फूलों तथा केसर की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़कर ही किसान समृद्धि की नई कहानी लिख सकते हैं। मत्स्य पालन व अन्य स्वरोजगार योजनाओं को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। गोष्ठी में किसान राजेंद्र पुनेठा, मोहन पांडे, राम सिंह, कमलकांत, भैरव राय, निर्मल चंद्र, राकेश उपाध्याय, संजय फर्त्याल, कुंदन पाटनी, रमेश राम, रघुवर राम सहित कई किसानों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली, डॉ. वसुंधरा, प्रभारी कृषि अधिकारी संतोषी, आशुतोष सिंह, साक्षी पांडे, सनम चौहान, एसपी सिंह, हिमांशु प्रसाद, स्वाति कुशवाहा व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।