Tuesday 11th of August 2026

ब्रेकिंग

टनकपुर:महिलाएँ हमारी संस्कृति, खेत और आजीविका की मुख्य धुरी: श्रीमती गीता धामी

15 अगस्त तक लोहाघाट महाविद्यालय की समस्याओं का समाधान न होने पर एनएसयूआई की आंदोलन की चेतावनी।

चंपावत: विज्ञान वर्ग का संचालन न होने पर स्वाला के ग्रामीणों का चुनाव बहिष्कार का ऐलान

चंपावत:बनलेख में सड़क दुर्घटना की सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी, चार घायलों का किया गया रेस्क्यू

लोहाघाट:चोमेल मे किसान सम्मान निधि के मैसेज भेज लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट किए हैक मांगी जा रही है धनराशि

सूचना

रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:26 किमी की दूरी तय कर पहुंचे जिला अस्पताल फिर भी नहीं हुआ एमआरआई, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल

Laxman Singh Bisht

Sun, Jul 19, 2026

26 किमी की दूरी तय कर पहुंचे जिला अस्पताल फिर भी नहीं हुआ एमआरआई, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल

जनपद में लोगों को नहीं मिल पा रहा है स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ

सीएम पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिले की परिकल्पना में स्वास्थ्य महकमा फेल।

पत्रकारों के द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल पूछे जाने पर पत्रकारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे है चिकित्सक

जनपद वासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए सीएम धामी ने खुद किया था एमआरआई मशीन का शुभारंभ।

चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चंपावत को मॉडल जिले के रूप में लगातार कार्य कर रहे हैं। ताकि चंपावत जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जा सके इसको लेकर पिछले महीने ही एमआरआई मशीन का खुद सीएम धामी ने उद्घाटन भी किया था।लेकिन इसको संचालित करने वाले जिला अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ही सीएम के विजन को गति देने में रोक लगा रहे हैं। जिसको लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मामला शनिवार का है जब मुख्यालय से 24 किमी दूर बाराकोट से एमआरआई जांच कराने पहुंचे एक मरीज का इलाज नहीं हो सका और वह बिना एमआरआई के ही वापस घर लौट गया। साथ ही पीड़ित ने दुबारा कभी जिला अस्पताल न आने की बात कही। पीड़ित ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें 18 जुलाई की तिथि दी गई थी। निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद तकनीशियन के उपलब्ध न होने के कारण जांच नहीं हो सकी। दूरदराज से लंबी यात्रा कर आए मरीज के लिए यह केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि समय, धन और मानसिक पीड़ा का विषय था। आक्रोशित मरीज ने अस्पताल प्रशासन के सामने ही अपना पर्चा फाड़ते हुए कहा कि वह दोबारा इस अस्पताल में उपचार के लिए कभी नहीं आएगा। यह प्रतिक्रिया किसी एक व्यक्ति की नाराजगी नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति जनता के घटते विश्वास का संकेत है।चिंताजनक पहलू यह भी रहा कि समस्या के समाधान पर ध्यान देने के बजाय अस्पताल प्रशासन और कुछ चिकित्सकों का ध्यान मीडिया कर्मियों से उलझने तथा पुलिस में शिकायत की बात करने पर अधिक दिखाई दिया। यदि व्यवस्था में कमी है तो उसे स्वीकार कर सुधार की दिशा में कदम उठाना ही प्रशासनिक परिपक्वता का परिचायक होगा। एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आधुनिक मशीनों और संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोगों में आए दिन नाराजगी देखने को मिल रही है।

जरूरी खबरें