रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : दो दिन से जिला अस्पताल के चक्कर काट रहा है 14 वर्षीय बालक स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए जरूर दस्तावेज न बनने से परेशान
Laxman Singh Bisht
Wed, Aug 20, 2025
दो दिन से जिला अस्पताल के चक्कर काट रहा है 14 वर्षीय बालक
स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए जरूर दस्तावेज नहीं बनने से परेशान
जिलाधिकारी की सराहनीय पहल का अधिकारियों पर नहीं पड़ रहा है असर
जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार जहां जिले के लोगों को हर प्रकार की सुविधा का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अभी भी अधिकांश अधिकारी अपने कारनामों से बाज नहीं आ रहे हैं। मॉडल जिले में जहां एक तरफ लोगों को हर प्रकार की सुविधा मिलने का वादा किया जा रहा है। वहीं दूसरी और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है। जिसका यहां के लोगों को खामियाजा भुगतान पड़ रहा है। चंपावत जिला अस्पताल के दो दिन से चक्कर काट रहा 14 वर्षीय बालक अपने स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए जरूरी दस्तावेजों के लिए भटक रहा है। लेकिन उसकी कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार टनकपुर क्षेत्र से अपनी 15 वर्षीय बहन के साथ स्पोर्ट्स कॉलेज की आवश्यक दस्तावेजों के लिए चंपावत जिला अस्पताल पहुंचा विक्की सिंह(14) पुत्र विनोद सिंह बोहरा दर-दर अपनी बहन को साथ लेकर घूम रहा है। लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। 14 वर्षीय विक्की सिंह ने बताया कि वह 15 वर्षीय अपनी दीदी के साथ आवश्यक दस्तावेजों को बनाने के लिए मंगलवार को चंपावत जिला अस्पताल पहुंचा था। इसके बाद उसे इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है। लेकिन उसे कहीं से भी राहत नहीं मिल पा रही है। जब कहीं से भी राहत नहीं मिली तो उसने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द इस पर सुनवाई करने की मांग उठाई है। दो छोटे-छोटे बच्चे अपने आवश्यक दस्तावेजों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत में दर-दर भटक रहे हैं। कहने को तो यहां मॉडल जिले की परिकल्पना की अनुरूप काम किया जा रहा है। लेकिन इस मॉडल जिले में यहां के अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। उच्च अधिकारियों से वार्ता की गई तो वह भी अपना पल्ला झाड़ने हुए नजर आ रहे हैं। आपस में तालमेल से काम न होने की बात भी सामने आ रही है। जहां एक तरफ बच्चे खेल के प्रति अपनी भावनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपना भविष्य खेल की दुनिया में तलाश रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्हें पहले प्रयास पर ही इस कदर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है कि वह आगे अपने सपनों को कैसे साकार कर सकेंगे।