रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : पाटी (चंपावत):ग्रामीणों ने श्रमदान कर खोली बांस बसवाड़ी गर्शलेख सड़क सरकार की नाकामी की उजागर पक्की सड़क के लिए जूझते ग्रामीण।
Laxman Singh Bisht
ग्रामीणों ने श्रमदान कर खोली बांस बसवाड़ी गर्शलेख सड़क पक्की सड़क के लिए जूझते ग्रामीण।
प्रशासन से मशीन भेज कर सड़क दुरुस्त करने की मांग।

श्रमदान में गांव के युवा, शिक्षक व बुजुर्गों ने किया सहयोग सरकार को दिखाया आईना।
चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक की बदहाल बांस बसवाड़ी गर्शलेख सड़क को आज शुक्रवार को क्षेत्र के युवाओं,बुजुर्गों व शिक्षकों के द्वारा श्रमदान कर यातायात के लिए सुचारू बनाकर सरकार की नाकामियों को उजागर किया। क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि में नैन सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने गेटी वेलचो की मदद से श्रमदान अभियान चलाया गया। श्रमदान कर रहे लोगों ने कहा दुनिया व देश चांद पर पहुंच चुका है पर आजादी के 80 वर्ष बाद भी क्षेत्र के ग्रामीण एक अदद सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं उन्होंने इसे शासन प्रशासन की नाकामी बताया। क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि नैंन सिंह ने बताया पूर्व में सड़क को विधायक निधि से काटा गया था। बरसात में भारी मलवा आने से सड़क लगभग 4 साल बंद रही। इसके बाद जिला अधिकारी के निर्देश पर सड़क को सुचारू बनाया गया था। पर इस बरसात में सड़क एक बार फिर से बदहाल हो चुकी है। जिसे आज ग्रामीणों के द्वारा किसी तरह श्रमदान कर छोटे वाहनों के संचालन के लिए शुरू किया गया। उन्होंने बताया ग्रामीण बरसों से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं शासन व प्रशासन के द्वारा उनकी सुध नहीं ली जा रही। उन्होंने बताया बदहाल सड़क होने की वजह से ग्रामीणों को इसका खामी आज कई रूपों में भुगतना पड़ता है। कृषि बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण किसानों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए कई मुसीबतें उठानी पड़ती है। समस्त ग्रामीण के द्वारा सरकार व प्रशासन से ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए जनहित में पक्की सड़क निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा जबकि धामी सरकार का दावा है गांव-गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है पर उनके गांव की सड़क की सुध नहीं ली जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मशीन भेज कर कच्ची सड़क को दुरुस्त करने की मांग की है ताकि ग्रामीण व कर्मचारी अपने दो पहिया वाहनों से आवाजाही कर सके ग्रामीणों ने कहा विधायक निधि से कटी सड़क में भी सरकार का ही पैसा लगा रहता है आखिर इन सड़कों की सुध क्यों नहीं ली जाती है क्या सरकार के नियम कानून जनता से बड़े हैं। मालूम हो आदर्श जिला चंपावत में ऐसे कई तोक व गांव बचे है जो आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। इन क्षेत्रों से आज भी मरीज को गर्भवती महिलाओं को डोली के सहारे अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। अब देखना है सरकार कब इन गांव की सुध लेती है। जबकि क्षेत्र के सांसद अजय टम्टा केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं पर उसके बावजूद उनके संसदीय क्षेत्र के गांव आज भी सड़क की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।
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