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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ पर गुरुकुलम एकेडमी लोहाघाट में उमड़ा देशभक्ति का सैलाब

Laxman Singh Bisht

Fri, Nov 7, 2025

वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ पर गुरुकुलम एकेडमी लोहाघाट में उमड़ा देशभक्ति का सैलाबगुरुकुलम एकेडमी स्कूल, खूना मानेश्वर में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं गरिमामय सामूहिक गायन समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जहाँ सैकड़ों विद्यार्थियों ने एक स्वर, एक ताल और एक भाव के साथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् गाकर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।विद्यालय के शिक्षक शशांक पाण्डे ने मंच से वंदे मातरम् के इतिहास और महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना 1875 में बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा की गई थी और यही गीत आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कन बन गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह गीत हमें हमारी मातृभूमि के प्रति सम्मान, त्याग और समर्पण की भावना सिखाता है।सामूहिक गायन के दौरान छात्रों के सुर और ताल का अद्भुत संगम पूरे वातावरण में गूंज उठा। छोटे-बड़े सभी वर्गों के विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से गायन में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति की ऊर्जा और उत्साह इतनी प्रबल थी कि उपस्थित सभी लोग इस क्षण को बेहद खास और यादगार बताते दिखे।इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधक राजेश पांडेय ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होना देश के लिए ऐतिहासिक पल है और विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है।प्रधानाचार्य भास्कर चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रगीत एक गीत नहीं होने के साथ ही भारतीय चिंतन, संस्कृति और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसी भावना को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।कोऑर्डिनेटर कविता पुनेठा, संगीत शिक्षक प्रदीप कुमार, अन्य समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यालय परिवार की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी ने बच्चों की स्वर लहरियों और अनुशासन की सराहना की।कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ यह ऐतिहासिक समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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