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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट :सुविधाओं से कोसों दूर निडिल का खेत तोक ना नेटवर्क न सड़क और ना रास्ते। बदहाल हालत में सीमांत का पहला गांव।

Laxman Singh Bisht

Sun, Sep 28, 2025

सुविधाओं से कोसों दूर निडिल का खेत तोक ना नेटवर्क न सड़क और ना रास्ते।बदहाल हालत में सीमांत का पहला गांव।

जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान ग्रामीणों की समस्या सुनने और समाधान करने जाएंगे खेत।

7 किलोमीटर पैदल चल स्कूल पहुंचते हैं छात्र।

बीमारो को 4 से 5 किलोमीटर पैदल चल डोली के सहारे पहुंचाया जाता है पंचेश्वर।

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों पर सुध न लेने के लगाए गंभीर आरोप।

सिर्फ वोट मांगने आते हैं जनप्रतिनिधि फिर नहीं दिखाई देती है शकल।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सीमांत के अंतिम गांव को पहला गाव मानने तथा उनका भरपूर विकास करने की बात कही गई है और सभी सरकारों को इस बात के निर्देश भी दिए गए हैं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड के सीमांत के गांव से विशेष लगाव है।पर उसके बावजूद भी आज सीमांत के पहले गांवो की हालत काफी दयनीय है। इन पहले गांव की सुध लेने ना तो जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं और ना प्रशासन के अधिकारी। लोहाघाट विधानसभा के नेपाल सीमा से लगे निडिल ग्राम सभा के खेत तोक के ग्रामीण आज भी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे है।खेत तोक लोहाघाट ब्लॉक का नेपाल सीमा से लगा पहला गांव है जो महाकाली नदी के किनारे बसा हुआ है। खेत के युवा भरत सिंह घटाल, केसर सिंह घटाल, वीरेंद्र सिंह घटाल व हीरा सिंह घटाल ने बताया पिछले 5 महीने से गांव में नेटवर्क नहीं है जिस कारण ग्रामीणों का लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है घटना दुर्घटना होने की स्थिति में ग्रामीण किसी को सूचना नहीं दे सकते हैं नेटवर्क ढूंढने उन्हें गांव से तीन से चार किलोमीटर दूर आना पड़ता है। कहा जबकि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है ।कहा आधुनिक युग में नेटवर्क ना होना अपने आप में काफी गंभीर बात है।भरत सिंह घटाल ने कहा सड़क की बात तो दूर गांव को आने वाले पैदल रास्ते पूरी तरह क्षतिग्रस्त है जिनमे पैदल चलना काफी कठिनाई भरा हो रहा है। गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए 7 किलोमीटर खड़ी चढ़ाई पर कर चमदेवल पहुंचना पड़ता है। अगर गांव को कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे डोली के सहारे 4 से 5 किलोमीटर पंचेश्वर सड़क तक लाना पड़ता है। भरत सिंह घटाल ने कहा क्षेत्र में जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट मांगने यहां आते हैं उसके बाद उनकी शकल तक नहीं दिखाई देती है। ना ही प्रशासन के अधिकारी गांव में उनकी समस्या जानने व सुध लेने पहुंचते हैं। कहा गांव में लगभग 15 परिवार वर्तमान में निवास करते हैं जो सुविधाओं के अभाव में काफी कठिनाइयों से भरा जीवन जी रहे हैं कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां है कि सीमांत के अंतिम गांव को पहला गांव माना जाए और उनका भरपूर विकास किया जाए पर उसके बावजूद आज उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।उनके लिए ना तो सड़क है ना रास्ते हैं ना नेटवर्क है और ना ही स्कूल और ना ही चिकित्सा व्यवस्था है। जबकि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। गांव के सामने ही महाकाली नदी पार नेपाल आर्मी का कैंप भी है और नेपाल के गांव में बेहतरीन नेटवर्क व्यवस्था और सुविधाएं वहा की सरकार के द्वारा दी गई है। घटाल ने बताया जबकि क्षेत्र कृषि बाहुल्य है यहा धान ,मक्का ,मड़वा ,आम ,केले प्रचुर मात्रा में होते हैं पर सड़क सुविधा न होने से उनके उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पाते है ।कहा सुविधाओं का अभाव होने के कारण कई परिवार यहा से पलायन कर चुके है कहा वह अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते लगाते थक चुके हैं। भरत घटाल व ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार से उनकी सुध लेने की गुहार लगाई है।

मामला संज्ञान में आने के बाद चंपावत के तेज तर्रार डीएम मनीष कुमार ने ग्रामीणों की सुध लेने उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए खेत गांव जाने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी ने कहा जल्द ही वह सीमांत के पहले गांव खेत जाएंगे और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। फिलहाल खेत के ग्रामीण काफी कठिनाई भरा जीवन जी रहे हैं। अब ग्रामीणों की आश सिर्फ जिलाधिकारी मनीष कुमार पर टिकी हुई है।

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