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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

Laxman Singh Bisht

Sat, Nov 8, 2025

भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

हिमालयी राज्यों पर पर्यटन का बुनियादी ढांचे, कला-संस्कृति एवं पर्यावरण पर प्रभाव l स्वामी विवेकानन्द राजकीय महाविद्यालय लोहाघाट में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में प्रोफेसर पद्मश्री शेखर पाठक, पर्यावरणविद एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल ने द्वारा कहा गया हिमालयों राज्यों में पर्यटन का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व है जिसमें सामुदायिक सहयोग से ही हिमालय राज्यों की विविधता से पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा सकता है l उत्तराखण्ड को अपनी प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित और सुरक्षित रखा कर पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए l राजीव भरतरी, सेवानिवृत्त, चीफ कन्सेर्वटिव (आईएफएस) ने उत्तराखण्ड में बढ़ रहे रिसोर्ट के प्रति अपनी चिंता व्यक्त किया सरकार को संवेदनशील स्थानों पर रिसोर्ट बनाने के लिए कठोर नियम लागू करना चाहिये जिससे कि आपदाओं से बचा जा सकता है l सोनम भूटिया, एसोसिएट प्रोफेसर, सिक्किम से जुड़े और कहा कि हिमालयों राज्यों में पर्यटन बहुत तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग है परन्तु प्रकृति का सतत् विकास से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए l

डॉ. अशिलामा, एसोसिएट प्रोफेसर, अरुणाचल प्रदेश से जुड़े और कहा कि आय और रोजगार को बढ़ावा देने में पर्यटन उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है l डब्टीटीसी के अनुसार विश्व के कुल सकल उत्पाद में 10 प्रतिशत योगदान है l हिमालयी राज्यों में प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और जैविक उत्पादों की वजह से पर्यटन उद्योग लोगों को आकर्षित करता है l

समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. संदेशा रायपा गर्व्याल, जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को प्रोत्साहित और बढ़ावा देने के लिए सरकारों को स्थानीय प्रकृति और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए

विशिष्ट अथिति सचिन जोशी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य चम्पावत द्वारा कहा कि हिमालयों क्षेत्रों के राज्यों, विशेष रूप में उत्तराखण्ड के चम्पावत जिला, जो पूरे उत्तराखण्ड को पर्यटन के क्षेत्र में गौरवान्वित

अपने कला, संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत एवं प्राकृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करता है l

अध्यक्षता डॉ. संगीता गुप्ता, प्राचार्य, स्वामी विवेकानन्द गवर्नमेंट पीजी कॉलेज लोहाघाट ने कहा कि अकादमिक सेमिनार प्राध्यापकों में नवाचार और शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है l समापन सत्र में डॉ. नीरज काण्डपाल ने दो दिवसीय सेमेस्टर की रिपोर्ट प्रस्तुत किया l संचालन डॉ. ममता बिष्ट एवं डॉ. स्वाति जोशी ने संयुक्त रूप से किया, सेमिनार संयोजक डॉ. दिनेश व्यास, सेमीनार समिति सदस्य-डॉ. रेखा जोशी, डॉ. किशोर जोशी, डॉ. ममता बिष्ट, डॉ. सीमा नेगी, डॉ. नीरज काण्डपाल, डॉ. स्वाति काण्डपाल एवं डॉ. सरस्वती भट्ट रहे l रजिस्ट्रेशन समिति-डॉ. भूप सिंह धामी, डॉ. दिनेश राम, डॉ.बंदना चंद, डॉ. सोनाली कार्तिकेय, डॉ. उपेंद्र सिंह चौहान एवं सरोज यादव l सेमिनार टेक्निकल समिति-डॉ. भगत राम लोहिया, डॉ. शांति यार्सो, डॉ. परितोष उप्रेती एवं डॉ. सुनील कुमार ।स्वागत समिति में डॉ अपराजिता, डॉ लता कैड़ा, डॉ. बीपी ओली, डॉ. प्रकाश लखेड़ा, डॉ. सुमन पाण्डे, डॉ. रुचिर जोशी l डॉ रवि सनवाल, डॉ. एस पी सिंह, डॉ. भूपसिंह धामी, डॉ. उपेन्द्र चौहान, डॉ. सोनाली कार्तिकेय, डॉ. पंकज टम्टा, डॉ. महेश त्रिपाठी, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. रुचिर जोशी, अनिता टम्टा, डॉ. सरोज यादव, डॉ. उमा काण्डपाल, डॉ. बन्दना चंद, डॉ.अर्चना त्रिपाठी, डॉ. मीना, डॉ अनिता खर्कवाल, डॉ. सुमन पाण्डे, डॉ. दीपक जोशी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिनेश राम, डॉ. शांति, डॉ. भगत राम, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नम्रता महर, श्रीमती गीतम, भावना खर्कवाल आदि उपस्थित रहे l

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