रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:वीरता की मिसाल: शंकर दत्त राय ने तीन दुश्मनों को ढेर कर मातृभूमि पर न्योछावर किया जीवन।
Laxman Singh Bisht
Sat, Nov 8, 2025
वीरता की मिसाल: शंकर दत्त राय ने तीन दुश्मनों को ढेर कर मातृभूमि पर न्योछावर किया जीवन।
राय नगर चौड़ी का वीर सपूत बना राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक
लोहाघाट। मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूत शहीद शंकर दत्त राय का जीवन साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल है। 15 जून 1970 को जनपद चंपावत के लोहाघाट ब्लॉक के राय नगर चौड़ी गांव में जन्मे शंकर दत्त राय ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया।प्रशिक्षण उपरांत वर्ष 1989 में उन्होंने ऑपरेशन पवन के तहत 9 कुमाऊं शांति सेना के साथ श्रीलंका में सेवा दी। इसके बाद वे ऑपरेशन राइनो के दौरान असम के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी वीरतापूर्वक तैनात रहे।बाद में उनकी पलटन को ऑपरेशन रक्षक के अंतर्गत भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती मिली, जहां से दुश्मन मात्र 200 से 300 मीटर की दूरी पर थे।21 जुलाई 1996 को सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश कर रहे तीन आतंकवादियों को उन्होंने बंकर से मौत के घाट उतार दिया। इस आमने-सामने की भीषण गोलीबारी में एक रॉकेट लांचर का गोला उनके सिर पर आ लगा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद शंकर दत्त राय ने मोर्चा नहीं छोड़ा और अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंत तक लड़े। 22 जुलाई 1996 को मात्र 26 वर्ष की आयु में उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत आज भी सीमाओं पर तैनात हर भारतीय जवान और देशभक्त नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।राय नगर चौड़ी का यह वीर सपूत आज भी लोगों के दिलों में अमर है। देश तुम्हें नमन करता है, वीर शंकर!
"तुम्हारे बलिदान से सांस ले रहा है यह वतन, तुम्हारी वीरता अमर रहेगी अनंतकाल तक..."