रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट: झूमाधुरी महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में बिखरे रंग, गूंजे लोकगीत और नृत्य।
Laxman Singh Bisht
Fri, Aug 29, 2025
झूमाधुरी महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में बिखरे रंग, गूंजे लोकगीत और नृत्य।
रंगारंग कार्यक्रमों की मची धूम देर रात तक थिरकते रहे दर्शक।
लोहाघाट के माँ झूमाधुरी महोत्सव के प्रथम दिवस की सांस्कृतिक संध्या इतिहास रचने वाली साबित हुई। मोहन पाटनी की अध्यक्षता एवं शशांक पाण्डेय और गिरीश कुंवर के संचालन में देर रात दो बजे तक चले इस कार्यक्रम में दर्शक मंत्रमुग्ध होकर लोक संस्कृति की विविध झलकियाँ देखते रहे। भीड़ से पंडाल खचाखच भरा रहा और हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और माँ झूमाधुरी के जयकारों के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ज़िला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी ने महोत्सव की परंपरा को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और लोक संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उनके साथ मंच पर ज़िला पंचायत सदस्य पाटन पाटनी प्रतिनिधि सचिन जोशी,वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश पाण्डेय,शिक्षक संघ के गोविंद बोहरा,फर्तोला ज़िला पंचायत सदस्य योगेश जोशी आदि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने आयोजकों और कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए महोत्सव को आगे भी इसी गरिमा और श्रद्धा के साथ जारी रखने की बात कही।
लोकगायक राकेश खनवाल ने जब मंच संभाला तो पूरा वातावरण कुमाऊँनी सुरों से गूंज उठा। उनके गीतों ने दर्शकों को कभी भावविभोर किया तो कभी झूमने पर मजबूर। उनकी आवाज़ में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और लोकजीवन की सादगी साफ झलक रही थी। दर्शक देर रात तक बैठे रहे और उनके गीतों पर तालियाँ बजाते रहे।प्रसिद्ध कविता डांसर ने अपने दमदार और मनमोहक नृत्य से सांस्कृतिक संध्या में नई ऊर्जा भर दी। उनकी अदाओं और भावभंगिमाओं पर दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से झूम उठे।
वहीं, जय गोलज्यू टीम चम्पावत के रघु राज अपनी पूरी टीम के साथ मंच पर आए। उनकी टीम ने लोक परंपराओं और आस्था से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया। गोलज्यू महाराज की महिमा और पहाड़ी संस्कृति की झलक उनके हर गीत-नृत्य में नजर आई।इस संध्या का आकर्षण इतना प्रबल था कि कार्यक्रम आधी रात तक चलता रहा, लेकिन दर्शक अपनी जगह से उठने को तैयार नहीं हुए। बच्चे, युवा, महिलाएँ और बुजुर्ग सभी पूरे उत्साह के साथ अंत तक मौजूद रहे।
लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन हैं बल्कि ये अपनी संस्कृति और परंपराओं को जिंदा रखने का सबसे सशक्त माध्यम भी हैं।झूमाधुरी महोत्सव की प्रथम संध्या ने यह साबित कर दिया कि कुमाऊँ की लोक संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। गीत, संगीत और नृत्य की यह संध्या केवल मनोरंजन नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और लोक जीवन का एक अद्भुत संगम बन गई।इस अवसर पर ग्राम प्रधान नीतू विश्वकर्मा,पूर्व प्रधान सुभाष कुमार, प्रकाश चंद्र,सोभन बोहरा,दीपक कुमार,बलवंत कुमार,हेम पाटनी,प्रकाश बोहरा,हरीश पाटनी, रोशन महर समेत कई लोग मौजूद रहे।