रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट पशु चिकित्सालय में टेक्नीशियन ना होने से सफेद हाथी बनी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन।
Laxman Singh Bisht
Fri, Nov 7, 2025
लोहाघाट पशु चिकित्सालय में टेक्नीशियन ना होने से सफेद हाथी बनी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन।
अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए बाहर के अस्पताल में ले जाने को मजबूर पशुपालक।
जांच न होने से बेजुबानों का सही से नहीं हो पा रहा है उपचार।
लोहाघाट।सरकार के द्वारा लोहाघाट पशु चिकित्सालय में लाखों रुपए की लागत से एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीने तो लगवा दी गई है पर सरकार मशीनों को चलाने के लिए टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं कर पाई ।जिस कारण लाखों रुपए की लागत से लगी हुई मशीने सफेद हाथी बनी हुई है। जिसके चलते पशु चिकित्सालय में पशुओं की बीमारी का सही से पता न चलने के कारण सही से उपचार नहीं हो पा रहा है। जिस कारण पशुपालकों को अपने पशुओं का अल्ट्रासाउंड व एक्सरे कराने के लिए बरेली व हल्द्वानी आदि शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। क्षेत्र के शिवम जोशी ने बताया पशु चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे मशीन है तो है पर टेक्नीशियन ना होने से यहा समय पर पशुओं की जांच नहीं हो पा रही है।
शिवम ने बताया उन्हें अपने डॉग का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बरेली ले जाना पड़ा। और यही शिकायत क्षेत्र के कई पशुपालकों की है पशुपालकों ने कहा अल्ट्रासाउंड व एक्सरे जांच न होने तथा अन्य सुविधाएं न होने से पशुओं की बीमारी का पता नहीं चल पाता है जिस कारण चिकित्सकों को उनके उपचार में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । कहा चिकित्सालय में अधिकतर दवाए बाहर से लानी पड़ती है लोगों ने कहा लोहाघाट पशु चिकित्सालय में दूर-दूर क्षेत्र से पशुपालक अपने पशुओं को लेकर आते है। लोगों ने शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से लोहाघाट पशु चिकित्सालय में दोनों मशीनों को संचालित करने के लिए टेक्नीशियन भेजने तथा पशु चिकित्सालय में सुविधाएं तथा दवा की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की है ताकि पशुओं का सही तरीके से उपचार हो पाए। लोगो ने कहा बीमारी का सही पता न चलने से कई पशुओं की मौत हो जाती है।
मामले में लोहाघाट पशु चिकित्सालय के डॉक्टर जनक चंद ने बताया पशु चिकित्सालय में दोनो मशीन तो हैं पर टेक्नीशियन नहीं है। जिस कारण पशुपालकों को यह सुविधा अस्पताल में नहीं मिल पा रही है। किसी तरह क्षेत्र के अन्य पशु चिकित्सकों के द्वारा मशीनों का संचालन कर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाती है ।उन्होंने कहा स्थाई टेक्नीशियन न होने से चिकित्सकों को पशुओ का उपचार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब देखना है बेजुबानों को सुविधा देने के लिए सरकार व पशुपालन विभाग क्या कदम उठाता है।