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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत :सड़क का अभाव अंत समय में भी नहीं मिला चार कंधों का सहारा आदर्श चंपावत का बोलता विकास

Laxman Singh Bisht

Tue, Sep 2, 2025

तल्ला देश मे मूसलाधार बारिश के बीच 12 किलोमीटर पैदल यात्रा कर ग्रामीणों ने एक डंडे के सहारे पन्नी में लपेटकर शव को पहुंचाया घर।

सरकारे आई और गई अधिकारी आते रहे जाते रहे नहीं बदली तल्ला देश की तस्वीर।

कंधों में शव 15 दिन में दूसरी घटना चंपावत जिले के रोडविहीन गांवों की व्यथा ।

तल्लादेश के खटगिरी गांव के बुजुर्ग संतोष सिंह के शव को मूसलाधार बारिश के बीच 12 किमी दूर खटगिरी गांव तक डंडे और प्लास्टिक की पन्नी से बांध कर ले गए ग्रामीण आदर्श चंपावत जिले के नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के कई क्षेत्रों में आज भी सड़क न होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बीमारो को किलोमीटर पैदल चल डोली में लाने-ले जाने की घटनाएं अक्सर सामने आते रहती हैं। लेकिन अब ऐसी घटना मृतकों के साथ भी होने लगी है। तल्लादेश के खटगिरी गांव से ऐसा घटना सामने आई है। सड़क न होने से यहां एक बुजुर्ग के शव को डंडे में पन्नी में लपेटकर ले जाना पड़ा। चंपावत के एक अस्पताल में इलाज के दौरान खटगिरी के संतोष सिंह (65) की सोमवार को मौत हो गई थी। ग्रामीण शव को चंपावत से 31 किमी दूर मंच तक जीप से लाए। इसके बाद मंच से 12 किमी दूर खटगिरी गांव तक सड़क न होने से शव को ले जाने के लिए डंडे और बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक की पन्नी से बांध कर 4 घंटे की पैदल यात्रा कर ग्रामीणों ने मूसलाधार बारिश के बीच शव को घर पहुंचाया । मृतक संतोष सिंह अपने पीछे पत्नी चंचला देवी और दो बेटे कुंदन सिंह व देवेंद्र सिंह को छोड़ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है वह सड़क के लिए शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके हैं पर उनकी सुनने को कोई तैयार नहीं है ग्रामीणों ने कहा वह मुख्यमंत्री की विधानसभा के निवासी पर आज भी बीमारो व शवो को डंडों के सहारे लाने के लिए मजबूर है।15 दिन पूर्व भी 19 अगस्त को भी ऐसा ही वाक्या सामने आया था जब पूर्णागिरि क्षेत्र के रोडविहीन कोटकेंद्री गांव में जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक कुंदन सिंह बोहरा की मौत हो गई थी। तब शिक्षक के शव को 3 किमी दूर पोथ के सड़क मार्ग तक कुर्सी के सहारे ले जाया गया। और फिर पोथ से हल्द्वानी तक जीप से पहुंचाया गया। बात चाहे तल्लादेश के रोडविहीन गांवों की हो या पूर्णागिरि क्षेत्र के सड़क से वंचित इलाकों की, ये उदाहरण क्षेत्र के विकास वह सरकार के दावों की पोल खोलते हैं। पलायन रोकने के लिए उठाए जा रहे सुनहरे दावों के बीच मार्मिक तस्वीर पेश करता है। इन क्षेत्रों में सुविधाओं का किस तरह अभाव है इसे बस इस तथ्य से जाना जा सकता है कि इन गांवों में ना रोड है न कोई स्वास्थ्य की सुविधा। ऐसे में पलायन ना हो, तो क्यों ना हो । ग्रामीण सड़क की मांग करते-करते थक चुके हैं पर सुध लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। आदर्श चंपावत जिले में सिर्फ विकास के दावे किए जा रहे। विकास के अभाव में दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। सड़क व सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण किस तरह का जीवन जी रहे हैं यह तस्वीर खुद उनकी कठिनाइयों को बयां करती है। शासन प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेना चाहिए।

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