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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत : गुदमी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितताओं का आरोप, सीएम पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत।

Laxman Singh Bisht

Wed, Sep 10, 2025

गुदमी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितताओं का आरोप, सीएम पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत।

जिलाधिकारी से भी की जांच की मांग। मुख्य विकास अधिकारी ने लोकपाल मनरेगा को दिए जांच के आदेश।चंपावत जिले की ग्राम पंचायत गुदमी, विकासखंड चंपावत में वर्ष 2019 से 2025 तक हुए विकास कार्यों और भुगतानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ललित मोहन कलोनी ने सीएम पोर्टल पर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। तथा जिलाधिकारी चंपावत से भी मामले की जांच की मांग करते हुए शिकायती पत्र दिया है।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाते हुए कहा जांच की जिम्मेदारी रखने वाले सहायक विकास अधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच आगे बढ़ाने के बजाय शिकायत की जानकारी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को दे दी। आरोप है कि इस कारण उन्हें सबूत मिटाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मौका मिल गया। शिकायतकर्ता ललितमोहन का यह भी कहना है कि ग्राम पंचायत विकाश अधिकारी उन्हें फोन पर धमका रही हैं।शिकायत में पूर्व ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया है। आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने अपने ही नाम पर कार्यों का भुगतान लिया, जबकि नियमों के अनुसार यह प्रतिबंधित है। उनके प्रतिनिधि और परिजनों को बार-बार मजदूर दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान किए जाने की भी बात सामने आई है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत अभिलेखों में लगभग 47 ऐसे लोगों को मजदूरी भुगतान दर्शाया गया जिनका ग्रामसभा गुदमी से कोई संबंध नहीं है। इन बाहरी व्यक्तियों पर करीब 2.8 लाख रुपये का खर्च दर्ज है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हुआ बल्कि स्थानीय मजदूरों के अधिकारों का भी हनन हुआ।भुगतान वाउचर और गतिविधि कोड पर भी सवाल उठे हैं। कई वाउचर बिना गतिविधि कोड के जारी हुए। चौथे राज्य वित्त आयोग के कार्यों में यह गड़बड़ी प्रमुख रूप से देखने को मिली। बिना प्रस्ताव और तकनीकी स्वीकृति के कराए गए कार्यों को वैध ठहराना मुश्किल माना जा रहा है।निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी संदेह जताया गया है। आठ अलग-अलग सीसी मार्ग निर्माण कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए, लेकिन कई मामलों में न तो गतिविधि कोड है और न ही geo-tag। पंचायत भवन की टाइलें और सार्वजनिक शौचालय की गुणवत्ता को भी मानकों के विपरीत बताया गया है।पंचायत में कुछ सप्लायर्स को लगातार बड़े भुगतान मिलने का मामला भी उजागर हुआ है। दो फर्मों को बार-बार लाखों रुपये का भुगतान किया गया। कई बार अधूरे बिल और बिना जीएसटी नंबर वाले बिल भी स्वीकार कर लिए गए। शिकायतकर्ता ने कहा आरटीआई के तहत जब बिल मांगे गए तो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने यह कहकर मामला टाल दिया कि “सभी बिल बाढ़ में बह गए।” जबकि पोर्टल पर उपलब्ध बिल अधूरे और संदिग्ध पाए गए।मनरेगा कार्यों में भी गड़बड़ी के आरोप हैं। मछली तालाब निर्माण में स्वीकृत लागत और वास्तविक व्यय में भारी अंतर सामने आया। लारा खेत सीसी मार्ग पर 1.27 लाख रुपये केवल अकुशल मजदूरी में दर्शाए गए, जबकि सामग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इतना ही नहीं, अन्य ग्रामसभाओं के निवासियों के नाम पर गुदमी ग्रामसभा में जॉब कार्ड बनाए गए।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बावजूद निष्पक्ष जांच की जगह उन्हें डराने और चुप कराने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। साथ ही, पूर्व ग्राम प्रधान , प्रतिनिधि और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाए। शिकायतकर्ताओं ने सभी कार्यों का , जियो टैगिंग,स्थल निरीक्षण और वित्तीय ऑडिट अनिवार्य करने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी चंपावत ने लोकपाल मनरेगा व पंचायत राज अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं। मामले में आरोपी शिकायत को बेबुनियाद व तथ्य हीन बता रहे है। आरोप काफी गंभीर है। यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा आरोपो में कितनी सच्चाई है।

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