रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:देवदार के बहुमूल्य वक्षों को सुखाने व सरकारी जमीन हथियाने का अभियान बे- रोक-टोक है जारी।
Laxman Singh Bisht
Sun, Sep 28, 2025
देवदार के बहुमूल्य वक्षों को सुखाने व सरकारी जमीन हथियाने का अभियान बे- रोक-टोक है जारी।
अपने अस्तित्व के लिए छटपटा रहा है काली कुमाऊं की शान रहा लोहाघाट नगर।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्याम पांडे ने भी जताई गंभीर चिंता। जिलाधिकारी एवं शासन को लिखा पत्र।
लोहाघाट। काली कुमाऊं की शान कहे जाने वाला लोहाघाट नगर आज ऐसे माहौल में अपना वजूद खोता जा रहा है। जहां इसकी सुरक्षा के लिए एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ वन एवं थाना समेत सभी अधिकारियों का यहां जमावड़ा बना हुआ है। इस नगर के लिए तो "बाढ़ ही खेत खा रही है और रोम जल रहा, नीरो बंसी बजा रहा" वाली कहावत हकीकत में देखने को मिल रही है। प्रकृति ने दुर्लभ प्रजाति के देवदार के पेड़ों से इस नगर को सजाया-संवारा था। इन पेड़ों के लिए मानव तो बड़ा दुश्मन बन रहा है। बल्कि राजस्व एवं वन विभाग भी कम दुश्मन नहीं है। जिसकी इन पेड़ों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी है, वही देवदार की हरियाली को उजाड़ रहे हैं। वर्ष 1984 में पिथौरागढ़ जिले के प्रकृति प्रेमी रहे जिलाधिकारी बृजेंद्र पाल ने नगर क्षेत्र के देवदार पेड़ों की बाकायदा राजस्व विभाग से गिनती कराई थी। तब यहां 15 हजार 139 पेड़ों में नंबरिंग की गई थी। उसके बाद 2013 में चंपावत जिले के अस्तित्व में आने के बाद पेड़ों में नंबरिंग का कार्य जिलाधिकारी श्री चौधरी द्वारा कराया गया। जिसमें लगभग 3200 पेड़ों की ही नंबरिंग हो पाई। शेष पेड़ 29 साल में कपूर की तरह उड़ गए। यदि आज इनकी गिनती की जाए तो यह संख्या आधी हो सकती है। नगर में पेड़ों की जड़ों में कील ठोक कर, गर्डलिंग या पेड़ों के नीचे कूड़ा एकत्रित कर उसमें आग लगाकर उन्हें सुखाया जा रहा है। सरकारी जमीन में धड़ल्ले से अतिक्रमण कर उसे बेचा जा रहा है। 3 साल पहले ही वन विभाग ने 100 सूखे देवदार के पेड़ वन निगम को सौंपे थे। इस बीच जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में एक ऐसा मामला आया है। जिसमें देवदार के 2 स्वीकृत हरे पेड़ों को मकान के लिए खतरा बताकर उन्हें काटने से रोक दिया गया। हालांकि यहां सरकारी जमीन एवं देवदार के पेड़ों को बचाने के लिए बड़ी सर्जरी एवं स्थाई समाधान की जरूरत है। लोग स्वयं पेड़ों को सुखाकर उन्हीं पेड़ों को मकान के लिए खतरा बताकर स्वीकृत करा रहे हैं। भले ही आम लोगों को अपने काम के लिए इन कार्यालयों में पापड़ बेलने पड़ते हैं लेकिन यहां हरे देवदार के पेड़ों को स्वीकृत कराने के लिए फाइलें सरपट दौड़ने लगती हैं। नगर पालिका द्वारा कई स्थानों में तारवाड़ लगाकर पेड़ों को बचाने का प्रयास किया गया है,लेकिन उसमें भी अतिक्रमण की मार पड़ी हुई है। वन एवं पर्यावरण दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे लोहाघाट में देवदार के पेड़ों के उजड़ते स्वरूप से वह बेहद चिंतित है। उन्होंने इस मामले में जिलाधिकारी व शासन को अपनी चिंता से अवगत भी करा दिया है।
उजड़ रहा है लोहाघाट नगर का प्राकृतिक सौंदर्य।
लोहाघाट। नगर के प्राकृतिक सौंदर्य को बचाने के लिए प्रयत्नशील नगर पालिका के अध्यक्ष गोविंद वर्मा का कहना है कि नगर की भूमि एवं पेड़ों को बचाने के लिए स्थाई उपाय किए जाने की तात्कालिक आवश्यकता है। उधर नगर एवं क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी इस नजारे को देखकर बेहद चिंतित हैं। लोग चाहते हैं कि यहां पेड़ों को सूखाने और सरकारी जमीन हथियाने का सिलसिला तत्काल बंद होना चाहिए।