रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:जाने कुमाऊँ के न्यायकारी गोलज्यू देवता का इतिहास: लेखक डॉक्टर सुधाकर जोशी
Laxman Singh Bisht
Mon, Jun 15, 2026
जाने कुमाऊँ के न्यायकारी गोलज्यू देवता का इतिहास: लेखक डॉक्टर सुधाकर जोशी
देवभूमि उत्तराखण्ड के कुमाऊं क्षेत्र में गोरल देवता न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।व्यक्ति न्याय के लिए अपनी समस्या को स्टांप पेपर में लिखकर गोरल देवता के मंदिर में रख जाते हैं।कहते हैं कि गोरल देवता की अदालत में हर व्यक्ति को न्याय मिलता है।गोरल देवता के प्रसिद्ध मंदिरों में उनकी जन्मस्थली गड़ी चंपावत में स्थित प्राचीन मंदिर,चितई अल्मोड़ा एवं घोड़ाखाल भवाली नैनीताल में स्थित मंदिर मुख्य हैं ,इसके अतिरिक्त डाना गोलू, ग़ैराड गोलू मंदिर भी हैं ।इन मंदिरों में हजारों की संख्याओं में लगी घंटियां गोरल देवता के प्रति लोगों की अटूट आस्था एवं विश्वास को प्रकट करती हैं। बहुत वर्षों पहले गड़ी कोट चंपावत में राजा झालराय के पुत्र हालराय का शासन था राजा हालराय की 7 रानियां थी लेकिन किसी की भी कोई संतान नहीं हुई तब राजा ने भगवान भैरव की पूजा एवं अनुष्ठान किया भैरव महाराज ने राजा के सपने में आकर राजा से कहा कि तुम आठवां विवाह करो जिससे तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी और तुम्हारी संतान के रूप में मैं स्वयं जन्म लूंगा कुछ दिनों पश्चात राजा हालराय शिकार करने जंगल में गए जंगल में उन्हें अचानक प्यास लगी तब वह एक तालाब के पास गए वहां पर उन्होंने देखा कि दो भयंकर भैंस आपस में लड़ रहे हैं ,और एक सुंदर स्त्री ने आकर उन दोनों भैंस को सींग से पकड़कर अलग कर दिया ,राजा यह देखकर आश्चर्यचकित हो गए और उस कन्या से परिचय पूछा उसने कहा कि वह पंच देवताओं की बहन कलिंगा है राजा हालराय ने कलिंगा से प्रभावित होकर उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और पंचदेव ने अपनी बहन का विवाह राजा हाल राय के साथ करवा दिया कुछ समय पश्चात रानी कलिंगा गर्भवती हुई जिसे जानकर राजा की अन्य सात रानियां जलने लगी जब प्रसव का समय निकट आया तो अन्य रानियों ने एक षड्यंत्र रचा और रानी कलिंगा से कहा कि प्रसव पीड़ा से बचने के लिए हम तुम्हारी आंख में एक पट्टी बांधेंगे और प्रसव के समय रानी कलिंगा के आंख में पट्टी बांध दी रानी कलिंगा ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया जिसे देखकर अन्य सात रानियों में अत्यंत जलन उत्पन्न हो गई और उन्होंने उस बालक को गाय की गोठ में बंद कर दिया जिससे की गाय भैंस उसे कुचलकर मार डालें और रानी कलिंगा के बगल में एक सिल और बट्टा रख दिया, रानी की आंख की पट्टी खोलकर कहा कि तुमने एक सिलबट्टे को जन्म दिया है यह देखकर रानी कलिंगा विलाप करने लगी अन्य सात रानियों ने देखा कि वह बच्चा गाय का दूध पी रहा है जिसे देखकर वह आश्चर्यचकित हो गई। उसके बाद उस बालक को उन्होंने बिच्छू घास की झाड़ी में फेंक दिया कुछ समय पश्चात देखा कि बालक वहां पर भी बिच्छू घास से खेल रहा है, फिर रानियों ने उस बालक को एक संदूक में बंद करके गौरी नदी में बहा दिया ,नदी में आए एक मछुवारे ने मछली पकड़ने के लिए नदी में फंदा डाला था मछुवारे ने जब फंदा नदी से ऊपर खींचा तो देखा कि उसमें एक संदूक फंसा हुआ है जब उसने उसे खोला तो उसमें से एक बालक निकला जिसे देखकर वह प्रसन्न हुआ क्योंकि वह भी संतान विहीन था उसने घर जाकर अपनी पत्नी माला को उस बालक को दिया जिसे देखकर माला बहुत प्रसन्न हुई धीवर दंपति ने उस बालक का नाम गौरी नदी से मिलने के कारण गोरिया रखा एवं उस बालक पालन पोषण खुशी से किया। जब बालक गोरिया थोड़ा बड़ा हुआ तो उसने अपने पिता से कहा कि मेरे लिए एक काठ का घोड़ा बना दो में उसमें बैठूंगा।मछुवारे ने काठ का घोड़ा बना कर दिया बालक गोरिया उस काठ के घोड़े से खेलने लगा और खेलते खेलते एक तालाब के किनारे पहुंचा वहां राजा हालराय की अन्य रानियां स्नान कर रही थी, बालक ने उन रानियों से कहा कि आप लोग थोड़ा तालाब से हट जाए मैं अपने घोड़े को पानी पिलाता हूं जिसे सुनकर रानियां हंसने लगी और कहा कि पागल बालक है कभी काठ का घोड़ा पानी पी सकता है बालक गोरिया ने कहा क्यों नहीं पी सकता है जब एक महिला सिलबट्टे को जन्म दे सकती है तो काठ का घोड़ा पानी पी सकता है

जब राजा हालराय तक यह बात पहुंची तो उन्होंने उस बालक को अपने राज दरबार में बुलाया बालक ने पूरा वृतांत सुनाया और खुद को उनका पुत्र कहा रानी कलिंगा मेरी मां है ,बालक की इस बात पर किसी ने विश्वास नहीं किया राजा ने बालक गोरिया से कहा कि इसका कोई प्रमाण दो तब गोरिया ने कहा कि मेरी माता के स्तनों के आगे लोहे के 7 तवे लगाए जाए और मेरी मां अपने स्तनों से दूध की धार डालेगी यदि यह मेरे मुंह में पहुंच गई तो मैं कलिंगा का पुत्र हुआ राजा ने ऐसा करने को कहा दूध की धार तवों को भेदते हुए बालक गोरिया के मुंह में गई जिसे देखकर सबको विश्वास हो गया रानी कलिंगा ने बालक को गले से लगा लिया रानी कलिंगा ने कहा कि सिलबट्टा मेरा पुत्र है और एक दूध की धार सिल पर डाली दूध की धार पढ़ते ही शिल फटा और वहां से भी एक बालक उत्पन्न हुआ सिल से उत्पन्न होने के कारण उसका नाम कालसिल पड़ा और दूसरी दूध की धार बट्टे पर पड़ी और वहां से भी एक बालक उत्पन्न हुआ जिसे हरुवा नाम दिया गया। राजा ने अन्य सात रानियों को मृत्युदंड दिया हालराय ने बाद में गढ़ी चंपावत की राजगद्दी गोरल को सौंप दी गोरल ने न्यायकारी राजा के रूप में राज किया और कलुआ और हरुवा देव ने उनके सेनापति के रूप में विभिन्न युद्धों का नेतृत्व किया।कलुआ देवता को चंपावत में कालेशन देवता के रूप में पूजा जाता है,जो अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध हैं।
लेखक:डॉ .सुधाकर जोशी
प्रधानाचार्य पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज दिगालीचौड़
