Sunday 9th of August 2026

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लोहाघाट:सड़क कनेक्टिविटी क्षेत्र में तेजी से हो रहा कार्य। गांवो को तेजी से जोड़ा जा रहा है सड़क मार्ग से: अजय टम्टा

हल्द्वानी में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, खड़गे का चुनावी शंखनाद। भाजपा पर साधा निशाना

लोहाघाट:डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग की तत्काल कार्रवाई डिग्री कॉलेज सड़क खुली।

दून:मुख्यमंत्री ने तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से मातृशक्ति को किया सम्मानित

लोहाघाट:भारी भूस्खलन से लोहाघाट डिग्री कॉलेज मार्ग बंद कई गांवो का कटा संपर्क।

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : पिथौरागढ़:एनएमएचएस परियोजना के तहत कृषि वैज्ञानिको ने किया दारमा घाटी का भ्रमण।

Laxman Singh Bisht

Sat, Jun 7, 2025

हिमालय के बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच खाद्य पोषण और आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने

स्थानीय कृषि उत्पादों को व्यावसायिक रूप देने के लिए किसानों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी।गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल (अल्मोड़ा )तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) लोहाघाट (चंपावत) की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय हिमालय मिशन (एनएमएमएस) द्वारा वित्तपोषित परियोजना के तहत पिथौरागढ़ जिले की चीन सीमा से लगी दारमा घाटी का भ्रमण किया।इस दौरान टीम ने छह जीवंत गांवों—दुक्तू, दांतू, तिदांग, बालिंग, नागलिंग और दर का दौरा किया। कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट की प्रभारी डॉक्टर दीपाली तिवारी व डॉक्टर शैलजा पुनेठा ने बताया इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय नकदी फसलों को मुख्यधारा में लाकर किसानों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र में बदलते जलवायु परिदृश्य के संदर्भ में।कहा इस क्षेत्र में पारंपरिक रूप से कुट्टू, हरे कुट्टू और राजमाश (राजमा) जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इसके अलावा, वनों में कुटकी, जटामांसी, जंगली लहसुन और जंगली जीरा जैसी औषधीय पौधों की समृद्ध विविधता पाई जाती है।लेकिन स्थानीय लोग अब भी इन कीमती फसलों की व्यावसायिक खेती के प्रति जागरूक नहीं हैं। कहा टीम के द्वारा दुक्तू गांव में तीन दिवसीय सर्वेक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें क्षेत्रीय किसान शामिल हुए। कार्यक्रम में समयरेखा और ग्राम संसाधन मानचित्र तैयार किए गए।

किसानों को स्थानीय फसलों जैसे कुट्टू और हरे कुट्टू से बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों का डेमो (प्रदर्शन) भी दिखाया गया, जिसमे उन्हें प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से आयवर्धन के अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। कहा यह पहल सीमावर्ती किसानों में जागरूकता और क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिससे जलवायु-संवेदनशील कृषि और वन-आधारित संसाधनों के माध्यम से सतत आजीविका को बढ़ावा दिया जा सके।जिससे किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सके। सरकार की ओर से इन सीमावर्ती किसानों को रोजगार से जोड़ने के लिए यह बेहतरीन कदम है। इन सीमावर्ती क्षेत्रो में समस्याएं काफी अधिक है और जलवायु परिवर्तन के कारण बड़ी संख्या में पलायन भी हो रहा है। पर सरकार के प्रयासों से इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में काफी तेजी आई है। अगर यहा के किसान अपनी पारंपरिक खेती को व्यावसायिक रूप देते हैं तो काफी अच्छी आय यहा के किसान अर्जित कर सकते हैं।क्योंकि काफी ज्यादा तादात में पर्यटक इन क्षेत्रों में आ रहे हैं। कार्यक्रम में आईटीबीपी के द्वारा टीम को भरपूर सहयोग किया गया। टीम मे डॉ निधि, पूजा ओली, प्रेरणा जोशी, विवेक सिंह रावत आदि शामिल रहे।

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