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पाटी:बॉस बस्वाडी मे टमाटर की खेती में जुटे किसान। सड़क बंद होने से बाजार तक नहीं पहुंचा पाते उत्पाद।

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : पाटी:बॉस बस्वाडी मे टमाटर की खेती में जुटे किसान। सड़क बंद होने से बाजार तक नहीं पहुंचा पाते उत्पाद।

Laxman Singh Bisht

Sun, Mar 29, 2026

बॉस बस्वाडी मे टमाटर की खेती में जुटे किसान। सड़क न होने से बाजार तक नहीं पहुंचा पाते उत्पाद।

ओने पोने दामों में फसल बेचने को मजबूत ग्रामीण।चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक के बॉस बस्वाडी ,बसान, गोलनासेरी , पटनगांव ,क्षेत्र मे इन दिनों किसान अपने खेतों में टमाटर, खीरा ,गोभी , इत्यादि फसलों को लगाने में जुटे हुए हैं। किसानो की यह फसल जून, जुलाई महीने में तैयार हो जाती है। क्षेत्र पंचायत सदस्य चंद्रकला और सामाजिक कार्यकर्ता नैन सिंह ने बताया ग्रामीणों का दुर्भाग्य है कि बॉस बस्वाडी से गर्शलेक लिंक सड़क पिछले 4 वर्षों से बंद होने के कारण किसान अपनी खेती बाजार में नहीं बेच पाते है ।जिस कारण बाहरी व्यापारी इसका फायदा उठा कर ग्रामीणों की टमाटर व अन्य फसलो को काफी कम दामों में खरीदते हैं व अपना काफी ज्यादा मुनाफा कमाते हैंउन्होंने बताया क्षेत्र के 300 से ज्यादा किसान टमाटर की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया सड़क लिंक न होने से किसानों को बाहरी व्यापारी को मजबूरन अपनी टमाटर ,खीरा, गोभी इत्यादि सब्जी की फसल को ओने पोने दामों में बेचना पड़ता है। उन्होंने जिलाधिकारी से बॉस बस्वाडी से गर्शलैक लिंक रोड को जल्द सुचारू रूप से चालू करने की मांग की है ।जिससे किसान अपने खेतो की सब्जी मार्केट मे बेच सके। उन्होंने कहा उन्हें पूरा विश्वास है।जिलाधिकारी बॉस बस्वाडी क्षेत्र वासियों की इस गंभीर समस्या का जरूर समाधान करेंगे। ग्रामीणों ने बताया यह सड़क पूर्व में विधायक निधि से कटी है पर 4 वर्ष पूर्व आपदा से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है तब से बंद पड़ी है। जिस कारण ग्रामीणों को 30 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। मालूम हो बरसात में जब बाहर से सब्जियां आनी बंद हो जाती हैंतब यही ग्रामीण जनता को टमाटर ,खीरा व गोभी आदि सब्जिया अपने खेतों में उगाकर उपलब्ध कराते हैं। कुल मिलाकर सरकार एक और गांव से पलायन रोकने व खेती किसानी को बढ़ावा देने की बात करती है। तो वहीं दूसरी ओर गांव की सड़क खोलने में वन विभाग के नियम आगे आ जाते हैं। जिसका खामियाजा सिर्फ यही क्षेत्र ही नहीं कई और क्षेत्र भी भुगत रहे है। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी तादाद में पलायन जारी है।

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