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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : धरती सुरक्षित रहेगी तभी मानवता सुरक्षित रहेगी:शशांक पाण्डे

Laxman Singh Bisht

Wed, Apr 22, 2026

धरती सुरक्षित रहेगी तभी मानवता सुरक्षित रहेगी:शशांक पाण्डे

प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को पूरे विश्व में अत्यंत उत्साह और जागरूकता के साथ पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस मानव समाज को यह याद दिलाता है कि हम जिस धरती पर रहते हैं, वही हमारे जीवन का आधार है। हमारी पृथ्वी मिट्टी, जल और पत्थरों का एक गोला नहीं है, बल्कि यह समस्त जीव-जगत की पालनहार है। इसी धरती पर पर्वत खड़े हैं, नदियाँ बहती हैं, समुद्र लहराते हैं, पेड़-पौधे लहलहाते हैं, पशु-पक्षी विचरण करते हैं और मनुष्य अपना जीवन व्यतीत करता है। इसलिए पृथ्वी का महत्व अनंत है और इसका संरक्षण हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।पृथ्वी को प्राचीन काल से माता का स्थान दिया गया है। भारतीय संस्कृति में धरती को धरा, भूमाता और वसुंधरा जैसे सम्मानजनक नामों से पुकारा गया है। जिस प्रकार माता अपने बच्चों को भोजन, आश्रय और स्नेह देती है, उसी प्रकार पृथ्वी भी हमें अन्न, जल, वायु, औषधियाँ, वन, खनिज और जीवन के लिए आवश्यक सभी साधन प्रदान करती है। यदि धरती न हो, तो जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। यही कारण है कि पृथ्वी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने के लिए पृथ्वी दिवस मनाया जाता है।आज के आधुनिक युग में मनुष्य ने विज्ञान, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है। बड़े-बड़े शहर बस गए, विशाल कारखाने स्थापित हुए, सड़कें बनीं और आधुनिक सुविधाएँ बढ़ीं। परंतु इस विकास की दौड़ में मनुष्य ने प्रकृति को गंभीर हानि पहुँचाई है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई की गई, नदियों को गंदा किया गया, पहाड़ों को काटा गया और धरती के संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया गया। आज विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बिगड़ता जा रहा है, जिसका परिणाम पूरी दुनिया भुगत रही है।

वायु प्रदूषण पृथ्वी के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। कारखानों, वाहनों और अन्य साधनों से निकलने वाला धुआँ वातावरण को दूषित कर रहा है। शुद्ध हवा के स्थान पर जहरीली गैसें फैल रही हैं, जिससे मनुष्य और पशु-पक्षियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बड़े शहरों में सांस लेना भी कठिन होता जा रहा है। स्वच्छ वायु जीवन के लिए अनिवार्य है, इसलिए वायु प्रदूषण को रोकना अत्यंत आवश्यक है। जल प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या बन चुका है। नदियों, तालाबों और झीलों में कचरा, प्लास्टिक और रासायनिक पदार्थ डाले जा रहे हैं। इससे जल स्रोत दूषित हो रहे हैं और पीने योग्य जल की कमी उत्पन्न हो रही है। जल ही जीवन है, परंतु यदि यही जल गंदा हो जाए तो जीवन संकट में पड़ जाता है। आने वाले समय में स्वच्छ जल की कमी मानवता के सामने बड़ी चुनौती बन सकती है।वनों की कटाई भी पृथ्वी के लिए अत्यंत हानिकारक है। पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन देते हैं, वर्षा लाने में सहायक होते हैं और वातावरण को संतुलित रखते हैं। पेड़ों के कटने से मिट्टी का कटाव बढ़ता है, तापमान में वृद्धि होती है और वन्यजीवों का घर नष्ट हो जाता है। अनेक पशु-पक्षी विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुके हैं। यदि जंगल समाप्त हो गए, तो पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाएगा।आज पृथ्वी ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। धरती का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसके कारण हिमनद पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और मौसम चक्र असंतुलित हो रहा है। कहीं अत्यधिक गर्मी पड़ रही है, कहीं असामान्य ठंड, कहीं बाढ़ आ रही है और कहीं सूखा पड़ रहा है। यह सब संकेत हैं कि प्रकृति हमें सावधान कर रही है।पृथ्वी दिवस का उद्देश्य औपचारिक कार्यक्रम करना नहीं है, बल्कि लोगों में यह भावना जगाना है कि यदि पृथ्वी सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी हमारे पूर्वजों की संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। हमें इसे सँभालकर अगली पीढ़ी को सौंपना है।हर व्यक्ति अपने छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यदि हम अपने घर और आसपास स्वच्छता रखें, पानी व्यर्थ न बहाएँ, बिजली की बचत करें, प्लास्टिक का उपयोग कम करें और अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ, तो पृथ्वी को बहुत लाभ होगा। यदि हम निजी वाहनों के स्थान पर साइकिल, पैदल चलना या सार्वजनिक परिवहन अपनाएँ, तो प्रदूषण कम किया जा सकता है। हमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनना होगा।यदि बचपन से ही बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का महत्व सिखाया जाए, तो वे बड़े होकर जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।भारत जैसे देश में पृथ्वी संरक्षण का विशेष महत्व है, क्योंकि यहाँ प्रकृति को पूजा जाता है। हमारे यहाँ नदियों को माता कहा जाता है, वृक्षों की पूजा की जाती है और पर्वतों को देवता माना जाता है। यह हमारी संस्कृति का महान संदेश है कि प्रकृति का सम्मान करो और उसके साथ सामंजस्य बनाकर चलो। आधुनिक जीवन में हमें इसी भावना को फिर से अपनाने की आवश्यकता है।हमें यह भी समझना चाहिए कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है। इस पर पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों, जलचर जीवों और असंख्य वनस्पतियों का भी समान अधिकार है।

यदि हम प्रकृति का नाश करेंगे, तो असंख्य जीवों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। पृथ्वी पर सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी एक का नुकसान अंततः सभी को प्रभावित करता है।अंततः, पृथ्वी दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी धरती के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी का भाव रखें। यह दिन हमें चेतावनी भी देता है कि यदि हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो भविष्य कठिन हो सकता है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम पर्यावरण की रक्षा करेंगे, प्रकृति को स्वच्छ रखेंगे, वृक्ष लगाएंगे और धरती को हरा-भरा बनाएँगे। यही सच्ची प्रगति है और यही मानवता की सेवा है।यदि हम आज पृथ्वी को बचाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें धन्यवाद देंगी। यदि हम आज चूक गए, तो भविष्य हमें कभी क्षमा नहीं करेगा। इसलिए अभी से, इसी क्षण से, पृथ्वी संरक्षण का संकल्प लें।

(लेखक सामाजिक विज्ञान विषय के अध्यापक एवं लोहाघाट निवासी हैं)

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