रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:सरकारी तंत्र की बेरुखी से आज जनता अपने को ठगा कर रही है महसूस: राज्य आंदोलनकारी संगठन
Laxman Singh Bisht
Sun, Nov 2, 2025
सरकारी तंत्र की बेरुखी से आज जनता अपने को ठगा कर रही है महसूस: राज्य आंदोलनकारी संगठन
उत्तराखंड वासियों के मूल अधिकारो एवं राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बचाने की जरूरत
विकास की बातें सिर्फ भाषणों तक रह गई है सीमित: राज्य आंदोलनकारी संगठन
उत्तराखंड राज्य के रजत जयंती स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन कारी संगठन ने लोहाघाट मे सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन प्रमुख उत्तराखंड राज्य निर्माणआंदोलनकारी एडवोकेट नवीन चंद्र मुरारी की अध्यक्षता व राज्य आंदोलनकारी सुरेंद्र बोरा के संचालन में आयोजित किया गया। जिसमें क्षेत्र के कई राज्य आंदोलनकारी शामिल हुए ।सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा जिस अवधारणा के साथ राज्य का गठन हुआ सरकारों ने उसे पूरी तरह भुला दिया गया है। विकास की बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित है उत्तराखंड के पहाड़ों में कभी आजीविका का आधार रही कृषि का दायरा लगातार सिमट रहा है ,युवा पीढ़ी के पलायन वन्य जीवों के उत्पात और कम उपज ने पहाड़ के खेतों को वीरान कर दिया है। बक्ताओं ने कहा राज्य बनने से पहले पहाड़ आवाद थे अब वीरान होते जा रहे हैं। जबकि राज्य निर्माण का मकसद इन गांवों को विकास से जोड़ना था ।कहा सरकारों का ध्यान गांव की ओर आज तक गया ही नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा ,स्वास्थ्य, सड़क संचार को अगर मजबूत किया होता तो हालात इस तरह खराब ना होते। राज्य आंदोलन कारियो ने कहा 25 साल से का अधिकांश भाग खाली हो चुका है। जल, जंगल, जमीन की बात करने वाला कोई नहीं है। राष्ट्रीय दलों ने शहीदों के सपनों के इस राज्य को सिर्फ सत्ता की पाठशाला बनाकर छोड़ दिया है, सत्ता रूढ़ दलों ने कभी आंदोलन कारियो की मनसा को समझने का प्रयास नहीं किया है। राज्य आंदोलन कारियो ने कहा लंबे संघर्ष घोर उत्पीड़न एवं उत्तराखंड के युवाओं ,मातृशक्ति और प्रबुद्ध नागरिकों के बलिदान के उपरांत उत्तराखंड राज्य निर्माण का लक्ष्य हासिल करने में हम सफल रहे हैं ।लेकिन राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के बावजूद भी हम बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दूरस्थ गांवो से पलायन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं।रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकारों द्वारा कोई ठोस पहल आज तक नहीं की गई है ।पलायन राज्य की एक बड़ी समस्या बन चुका है। इसके समाधान के लिए ठोस प्रभावी उपाय करने जरूरी है। राज्य आंदोलन कारियो ने कहा राज्य के पर्वतीय क्षेत्र से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाई दिया। 25 वर्ष में खेती योग्य भूमि का रग़वा हजारों हेक्टेयर से अधिक घटा है ।उत्तराखंड में साहसिक ,आध्यात्मिक ,पर्यावरण पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तथा साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सार्थक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। बक्ताओं ने कहा उत्तराखंड राज्य आंदोलन का आगाज शानदार था लेकिन आज हम राज्य की बुनियादी चीज और निर्माण के कारक की भूल गए हैं जबकि यह प्रेरणा के स्रोत होने चाहिए। कहा आज सबसे बड़ी चुनौती पलायन और बेरोजगारी है उत्तराखंड एक हिल स्टेट है और पहाड़ों के विकास के लिए इसे बनाया गया इसका ध्यान सरकारों को रखना होगा। राज्य आंदोलन कारियो ने कहा जनप्रतिनिधियों का ध्यान सिर्फ सत्ता सुख भोगने वह झूठी घोषणाएं करने पर है धरातल पर कार्य करने पर नहीं। राज्य आंदोलन कारियो ने कहा आज उन लोगों को उत्तराखंड राज्य की दुर्दशा की काफी पीड़ा है यह सरासर राज्य आंदोलन कारियो व शहीदों का घोर अपमान है। सम्मेलन में राज्य आंदोलनकारी प्रहलाद सिंह मेहता, बृजेश महरा, भूपेश देव (ताऊ ), पूरन उप्रेती , भुवन जोशी ,राजू गढ़कोटी, राजकिशोर ओली,विजय ढेक ,नवीन खर्कवाल, नवीन ओली, कैलाश चिलकोटि , जोगा सिंह देव ,हरीश उप्रेती ,अर्जुनढेक, सुरेंद्र सिंह ढेक आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।