रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:गुरुकुलम एकेडमी में स्वामी दिव्या कृपानंद का ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन
गुरुकुलम एकेडमी में स्वामी दिव्या कृपानंद का ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन
विद्यार्थियों को दिए सफलता और संस्कार के सूत्र

लोहाघाट स्थित गुरुकुलम एकेडमी में आध्यात्मिक एवं शैक्षिक वातावरण के मध्य एक विशेष प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अद्वैत आश्रम मायावती के विद्वान संत एवं प्रबुद्ध भारत पत्रिका के संपादक स्वामी दिव्याकृपानंद जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालय परिसर में उनके आगमन पर समस्त विद्यालय परिवार द्वारा गर्मजोशी, श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।

शशांक पाण्डे के संचालन में हुए कार्यक्रम में, स्वामी दिव्याकृपानंद जी ने विद्यार्थियों को सनातन धर्म की महान परंपरा, उसके मूल सिद्धांतों तथा भारतीय संस्कृति की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति है, जो मानवता, सेवा, सत्य, करुणा, सहिष्णुता और आत्मविकास का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाते हैं तो वे न केवल सफल छात्र बनेंगे, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक भी बन सकेंगे।उन्होंने बच्चों को धर्म का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ या रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करना, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करना, सत्य बोलना, अनुशासित रहना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी धर्म का ही स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को सही दिशा और उच्च विचारों की सबसे अधिक आवश्यकता है।

स्वामी जी ने विद्यार्थियों को एकाग्रता का महत्व बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल, सोशल मीडिया और अन्य आकर्षण विद्यार्थियों के मन को भटकाते हैं, जिससे पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि यदि मन को नियंत्रित कर लक्ष्य पर केंद्रित किया जाए तो कोई भी सफलता असंभव नहीं है। नियमित अध्ययन, ध्यान, योग और समय का सदुपयोग विद्यार्थियों को महान ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।उन्होंने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और जागरूकता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर असीम शक्ति विद्यमान है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और सही दिशा देने की है।

विद्यालय के प्रबंधक राजेश पाण्डेय ने स्वामी जी का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे संतों का सान्निध्य विद्यार्थियों के जीवन निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं विद्यालय की कोऑर्डिनेटर कविता पुनेठा ने उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि स्वामी जी के विचार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर रियाज़ अहमद, महेंद्र जोशी, चंद्र भानु, अंकित देव, नेहा दत्ता, अमित तिवारी, मनमोहन गहतोड़ी, दीपा कोठारी, जीवन जोशी सहित विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ और विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और उच्च आदर्शों को भी अपने जीवन में अपनाएंगे।
