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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा लोहाघाट का नशा-मुक्त और सुव्यवस्थित होली रंग महोत्सव—शशांक पाण्डेय

Laxman Singh Bisht

Sun, Mar 1, 2026

राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा लोहाघाट का नशा-मुक्त और सुव्यवस्थित होली रंग महोत्सव—शशांक पाण्डेयउत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं में होली रंगों के त्योहार के साथ ही संगीत, भक्ति, सामूहिकता और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। इसी परंपरा को जीवंत रूप देने वाला होली रंग महोत्सव लोहाघाट इस वर्ष भी अभूतपूर्व सफलता के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव बनकर सामने आया।जब रामलीला मैदान में खड़ी होली की मधुर धुनें गूँजीं, तो वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक आभा फैल गई। शास्त्र आधारित होली गीतों की लय और ताल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पीढ़ियों से संजोई गई सांस्कृतिक विरासत स्वयं मंच पर आकर जीवंत हो उठी हो। हर प्रस्तुति में समर्पण, साधना और सांस्कृतिक गर्व स्पष्ट झलक रहा था।इस वर्ष महोत्सव की विशेषता यह रही कि इसकी गूंज केवल लोहाघाट तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया, स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से कार्यक्रम की वीडियो और तस्वीरें दूर-दूर तक पहुँचीं और देश के प्रमुख समाचार माध्यमों की सुर्खियाँ बनीं। इससे न केवल महोत्सव की लोकप्रियता बढ़ी, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त मंच मिला। छोटे से पर्वतीय नगर की यह सांस्कृतिक झंकार पूरे देश में सुनाई देना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है।महिलाओं की होली ने इस बार विशेष रूप से सबका ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिलाओं ने जब सामूहिक रूप से स्वर मिलाया, तो वातावरण श्रद्धा, उल्लास और आत्मीयता से भर उठा। उनकी प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि यह संदेश भी थी कि हमारी लोक परंपराएँ घर-घर में जीवित हैं और नई पीढ़ी उन्हें पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है। महिलाओं की सशक्त और सधी हुई प्रस्तुतियों ने महोत्सव को नई ऊँचाई प्रदान की।प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान की। उनके आगमन से यह स्पष्ट संदेश गया कि राज्य सरकार लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने न केवल कलाकारों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि पूरे आयोजन को राज्य स्तरीय पहचान भी दिलाई।इस महोत्सव का सबसे प्रेरणादायक पहलू इसका पूर्णतः नशा-मुक्त और अनुशासित स्वरूप रहा। जहाँ आज के समय में बड़े आयोजनों में अव्यवस्था और असंयम की घटनाएँ देखने को मिलती हैं, वहीं लोहाघाट का यह आयोजन सामाजिक मर्यादा और संयम का आदर्श उदाहरण बना। दर्शकों और प्रतिभागियों ने जिस शालीनता और अनुशासन का परिचय दिया, वह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह सिद्ध करता है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम तभी सफल होते हैं जब उनमें संयम और संस्कार का समावेश हो।होली की टीम की एक जैसी स्वच्छ, सुंदर और पारंपरिक पोशाकें आयोजन की गरिमा को और बढ़ा रही थीं। मंच पर उपस्थित प्रत्येक कलाकार एकता और अनुशासन का प्रतीक प्रतीत हो रहा था। गानों की लय, स्वर की सटीकता और ताल का सामंजस्य इतना प्रभावशाली था कि हर प्रस्तुति दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ रही थी। यह स्पष्ट दिख रहा था कि कलाकारों ने लंबे समय तक अभ्यास और तैयारी की है।अलग-अलग गाँवों की होली एक ही मंच पर देखने का अवसर इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता रही। इससे न केवल विविध सांस्कृतिक शैलियों का परिचय मिला, बल्कि क्षेत्रीय एकता और सामूहिकता की भावना भी मजबूत हुई। विविधता के इस सुंदर संगम ने यह संदेश दिया कि भले ही गाँव अलग हों, पर संस्कृति की धड़कन एक है।इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे अध्यक्ष जीवन सिंह मेहता और उनकी समर्पित टीम का अथक परिश्रम निहित है। उनकी दूरदर्शिता, संगठन क्षमता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता ने इस महोत्सव को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। मंच की व्यवस्था से लेकर अतिथियों के स्वागत, सुरक्षा, अनुशासन और कार्यक्रम के सुचारु संचालन तक हर व्यवस्था सुव्यवस्थित और सराहनीय रही।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि होली रंग महोत्सव लोहाघाट इस वर्ष केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, नशा-मुक्ति का संदेश, महिला सहभागिता, युवा ऊर्जा और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण का व्यापक अभियान बन गया। इसने यह सिद्ध किया कि जब समाज एकजुट होकर अपनी संस्कृति को संजोने का संकल्प लेता है, तो सफलता और सम्मान स्वयं उसके द्वार पर आ खड़े होते हैं।आने वाले वर्षों में भी यह महोत्सव इसी भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक समर्पण के साथ आगे बढ़ता रहे, यही सभी की शुभकामना है। लोहाघाट की यह सांस्कृतिक गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती रहेगी और हमारी लोकधरोहर को नई ऊर्जा प्रदान करती रहेगी।

(लेखक लोहाघाट निवासी एवं समसामयिक मुद्दों पर नियमित लिखते है)

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