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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:बोझा ढोकर बच्चों को पालने को मजबूर खीमा देवी को सरकारी मदद की दरकार।

Laxman Singh Bisht

Mon, Jan 12, 2026

बोझा ढोकर बच्चों को पालने को मजबूर खीमा देवी को सरकारी मदद की दरकार।

ना मिला अटल आवास ना बना खाद्य सुरक्षा कार्ड और न बन पाई गौशाला।

5 साल पूर्व पति का हो चुका है निधन दो साल पूर्व दो बच्चों ने छोड़ दिया स्कूल।

बेटा स्कूल छोड़ छोटी उम्र में कमाने को निकला प्रदेश। खीमा देवी की डीएम से मदद की गुहार।उत्तराखंड सरकार के द्वारा प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाए संचालित की गई है। जिनका लाभ प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के द्वारा लिया जा रहा है। पर आज भी इन योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्र के कई गरीबो को नहीं मिल पा रहा है। जिसका उदाहरण है चंपावत जिले के लोहाघाट विधानसभा के सीमांत क्षेत्र पासम की नगरू घाट की रहने वाली खीमा देवी। खीमा देवी के पति संतोक सिंह का 5 साल पूर्व बीमारी के चलते निधन हो गया था। परिवार का भरण पोषण करने वाले वह एकमात्र सदस्य थे।खीमा देवी ने बताया पति के निधन के बाद उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने बताया उनकी तीन बेटी और एक बेटा है बेटे ने स्कूल छोड़ दिया है और परिवार संभालने के लिए वह छोटी सी उम्र में दिल्ली में वर्तमान में नौकरी कर रहा है तथा आर्थिक अभाव के चलते एक बेटी स्कूल छोड़ चुकी है ।कहा दो बेटियां कक्षा 11 में जीआईसी रोसाल में पढ़ रही है उनकी फीस भी माफ नहीं की गई है। जिन्हें नगरू घाट से रोज 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है गाड़ी का भाड़ा देने तक के लिए उनके पास पैसे नहीं है। खीमा देवी ने बताया वह बोझा ढोकर किसी तरह बच्चों का लालन पालन कर रही हैं मजदूरी भी रोज नहीं मिल पाती है। कहा पहले खेतों में खेती होती थी लेकिन गूल टूटने से खेतों को पानी न मिलने के कारण अब खेत भी पूरे बंजर हो चुके हैं। खीमा देवी ने कहा मोदी और धामी सरकार के द्वारा गरीबों के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं पर इन योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है ।उन्होंने कहा ना तो उन्हें अभी तक अटल आवास मिला है ना गौशाला मिली है और ना ही उनका खाद्य सुरक्षा का राशन कार्ड बना है। जिस कारण उन्हें बच्चों का लालन पालन करने में काफी कठिनाइयों आ रही है ।बताया एक बेटी शादी के लायक हो चुकी है जिसकी चिंता उन्हें सता रही है। खीमा देवी ने कहा आज से 5 साल पूर्व जब उनके पति बीमार हुए थे तब उन्होंने कर्ज लेकर उनका उपचार कराया आज भी वह उस कर्ज को मजदूरी कर चुका रही है अभी भी काफी कर्ज उन्हें चुकाना है। खीमा देवी ने जिलाधिकारी चंपावत से उनकी मदद कर सरकारी योजनाओं का लाभ देने की गुहार लगाइ है। तथा उनके खेतों की गूल की मरम्मत करने की मांग की है ताकि वह खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण सके कहां उन्हें पूरा विश्वास है जिस तरह से जिलाधिकारी सभी गरीबों की मदद कर रहे हैं उनकी भी मदद अवश्य करेंगे। खीमा देवी वह महिला है जो पति की मौत का सदमा झेलने के बाद भी आज कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों व मवेशियों का लालन पालन कर रही है। नगरू घाट में खतरनाक रास्तों पर भारी बोझ ढोते हुए या मजदूरी करते हुए उन्हें देखा जा सकता है। खीमा देवी ने हिम्मत नहीं हारी है और लगातार संघर्ष यह महिला कर रही है। अगर सरकारी मदद इन्हें मिल जाए तो इनका जीवन का बोझ कुछ काम जरूर हो जाएगा।

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