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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:हर घर में उन्नत गाय, हर मन में सेवा की भावना राय नगर चौड़ी ने गढ़ा आदर्श गांव का नया मानक।

Laxman Singh Bisht

Tue, Nov 25, 2025

हर घर में उन्नत गाय, हर मन में सेवा की भावना राय नगर चौड़ी ने गढ़ा आदर्श गांव का नया मानक।

उन्नत पशुपालन, जैविक खेती, शत–प्रतिशत शिक्षा और अनुशासित समाज—राय नगर चौड़ी हर मानक पर आदर्श गांव बनने की प्रेरक कहानी लिख रहा है।लोहाघाट। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप चंपावत को मॉडल जिला बनाने का सपना जिस गांव ने वास्तविक धरातल पर उतारा है, वह है राय नगर चौड़ी। मात्र 700 की आबादी वाला यह गांव अनुशासन, एकजुटता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का ऐसा उदाहरण है जिसे आज पूरा जनपद आदर्श मानता है।इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक संस्कार हैं। यहां के अधिकांश निवासियों ने जीवन में कभी पुलिस थाना देखा तक नहीं। आपसी सम्मान, सद्भाव और अनुशासन से यहां सामाजिक ताना-बाना इतनी मजबूती से बुना गया है कि विवाद जैसी चीजें यहां अपवाद मात्र हैं।कृषि और पशुपालन में राय नगर चौड़ी अग्रणी है। गांव के प्रत्येक घर में 2–3 उन्नत नस्ल की दुधारू गाय बंधी होती हैं। दूध उत्पादन में यह गांव जिले में शीर्ष पर माना जाता है। साथ ही जैविक सब्ज़ी उत्पादन में भी यहां के किसान अग्रिम पंक्ति में खड़े होते हैं। लोहाघाट नगर तथा राजकीय पीजी कॉलेज के निकट होने के कारण गांव की सब्जियों और दूध की सदैव अधिक मांग रहती है।गांव की स्वच्छता संस्कृति इसकी पहचान है। साफ-सफाई, नौलों का रखरखाव और व्यवस्थित रास्ते—ये सब यहां की पीढ़ियों ने विरासत के रूप में संभाल रखा है ।मातृ शक्ति का विशेष योगदान रहता है।राय नगर चौड़ी शत-प्रतिशत शिक्षित गांव है। उच्च शिक्षा के प्रति लोगों में निरंतर उत्साह देखा जाता है। गांव के प्रत्येक परिवार के सदस्य सरकारी योजनाओं एवं अल्प बचत समूहों से भी जुड़े हुए हैं। युवाओं को भटकाव से बचाने के लिए गांव में जिम, पुस्तकालय और सामुदायिक गतिविधियों की सुविधा उपलब्ध है। सामुदायिक सेवा में गांव के लोग हमेशा आगे रहते हैं। गांव के ही फार्मासिस्ट कुलदीप राय की नियमित सेवा ने गांव को अस्पताल निर्भरता से काफी हद तक मुक्त कर दिया है।संस्कृति और कला संरक्षण में यह गांव अनूठा उदाहरण है। यहां का हर युवा और बुजुर्ग बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के रामलीला में किसी भी पात्र की भूमिका निभाने के लिए तैयार रहता है। यहां तक कि बच्चों के रोने में भी संगीत का स्वर सुना जाता है। यह चंपावत जिले का पहला ऐसा गांव है जहां दो सिंचाई योजनाएं संचालित हैं। कृषि समृद्धि का यह बड़ा कारण है। विदेश से लौटकर जनसेवा की भावना रखने वाले प्रेम बल्लभ राय ने यहां 250–300 ग्राम वजनी डिलीशियस सेब का बगीचा तैयार किया था, जो लंबे समय तक गांव की पहचान बना रहा। गांव की सबसे अनूठी परंपरा मांगलिक कार्यों में दिखाई देती है। विवाह समारोहों का पूरा आयोजन गांव के युवा मिलकर इतनी सहजता से कर देते हैं कि कन्या पक्ष व वर पक्ष को इसका अहसास भी नहीं होता है। ग्राम पंचायत के पास टेंट सहित सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। किन्तु यहां एएनएम सेंटर की कमी सबको खलती रहतीं हैं। शिक्षाविद् नाथूराम राय, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त नरेश राय, रंगकर्मी भैरव राय, गंगा दत्त राय, धर्मा नंद राय , पूर्व प्रधान जितेंद्र राय , प्रकाश राय, कमल राय आदि प्रमुख लोगों का कहना है कि वे अपने को खुश नशिब मानते हैं कि अपनी भावी पीढ़ी के कदम सही दिशा व दशा की ओर बढ़ते जा रहे हैं।राय नगर चौड़ी अनुशासन, उन्नत खेती, एकता और सेवा भावना से बना चंपावत का आदर्श गांव ।

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