रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : लोहाघाट : 90 वर्ष की बसंती पाण्डेय ने तीन पीढ़ियों संग किया मतदान, गांव पाटन-पाटनी में मिसाल बनी प्रेरक घटना
Laxman Singh Bisht
Thu, Jul 24, 2025
लोहाघाट ब्लॉक की 90 वर्ष की बसंती पाण्डेय ने तीन पीढ़ियों संग किया मतदान, गांव पाटन-पाटनी में मिसाल बनी प्रेरक घटना
लोकतंत्र की असली ताक़त क्या होती है, यह देखने को मिला चम्पावत ज़िले के लोहाघाट ब्लॉक की ग्राम पंचायत पाटन पाटनी में, जहाँ 90 वर्षीय बसंती देवी पाण्डेय ने पंचायती चुनाव में मतदान कर पूरे क्षेत्र को जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। विशेष बात यह रही कि बसंती देवी के साथ उनके पुत्र भगवत प्रसाद पाण्डेय और पौत्र शशांक पाण्डेय ने भी मतदान किया — तीन पीढ़ियों का यह ऐतिहासिक क्षण सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।बसंती देवी, जिनकी उम्र अब 90 पार कर चुकी है, इस चुनावी माहौल में एक उदाहरण बनकर उभरीं। उन्होंने अपने परिजनों की सहायता से मतदान केंद्र तक पहुँचकर अपने मत का प्रयोग किया।
उनकी यह भावना स्पष्ट रूप से बताती है कि लोकतंत्र की असली सुंदरता तब सामने आती है, जब नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग पूरी निष्ठा से करते हैं।स्थानीय निवासियों का कहना है कि बसंती देवी हर चुनाव में मतदान करना अपनी ज़िम्मेदारी समझती हैं। उनके मुताबिक, “देश ने हमें वोट का अधिकार दिया है — यह अधिकार नहीं, एक अमूल्य उत्तरदायित्व है।”उनके बेटे भगवत प्रसाद पाण्डेय ने कहा, “माँ हमेशा हमें यही सिखाती हैं कि देश और समाज के लिए सोचने का पहला कदम वोटिंग से शुरू होता है। हमने बचपन से उन्हें यही करते देखा है — मौसम चाहे कैसा भी हो, शरीर में कैसी भी हालत हो, उनका लोकतंत्र के प्रति समर्पण कभी नहीं डगमगाया।”पौत्र शशांक पाण्डेय, जो युवा वर्ग से आते हैं, ने कहा, “हमारी दादी का हौंसला देखकर हम कभी भी मतदान से पीछे नहीं हट सकते। उन्होंने सिखाया है कि लोकतंत्र के विकास में हर वोट का मतलब होता है। यह हमारा हक नहीं, कर्तव्य है।”इस तीन पीढ़ियों की मतदान सहभागिता ने न केवल गांव में बल्कि पूरे क्षेत्र में मतदान के प्रति उत्साह बढ़ाया। कई बुजुर्ग और महिलाएँ, जो पहले मतदान को लेकर अनिच्छुक थीं, उन्होंने भी प्रेरित होकर मतदान केंद्र का रुख किया।बसंती देवी का साहस और उनका योगदान प्रशासन के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह साबित होता है कि जागरूकता केवल पढ़ाई से नहीं, सोच और संस्कारों से आती है।इस तरह की घटनाएं केवल समाचार नहीं होतीं — यह समाज का आइना होती हैं। जहां एक ओर चुनाव प्रचार, वादों और नारों से भरा रहता है, वहीं इस तरह के मौन लेकिन प्रभावशाली कृत्य ही लोकतंत्र की आत्मा होते हैं।बसंती देवी और उनका परिवार आज केवल अपने गांव के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए यह सिखा गया कि जब लोकतंत्र की बात हो, तो कोई भी उम्र छोटी या बड़ी नहीं होती — जो ज़रूरी होता है, वह है संकल्प और चेतना।