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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चम्पावत में पहली बार ऐसे डीएम देखे, जो जनता से सीधे जुड़े हैं-शशांक पाण्डेय

Laxman Singh Bisht

Tue, Mar 17, 2026

चम्पावत में पहली बार ऐसे डीएम देखे, जो जनता से सीधे जुड़े हैं-शशांक पाण्डेय

उत्तराखण्ड के चम्पावत जनपद में प्रशासनिक कार्यशैली को नई दिशा देने वाले जिलाधिकारी मनीष कुमार का नाम आज आम जनमानस के बीच विश्वास, सादगी और सख़्ती के संतुलित प्रतीक के रूप में उभरकर सामने आया है। एक ओर जहाँ वे आम जनता से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुनते हैं, वहीं दूसरी ओर लापरवाह अधिकारियों के प्रति उनका कड़ा रुख यह संदेश देता है कि शासन-प्रशासन में ढिलाई के लिए कोई स्थान नहीं है। उनकी कार्यशैली में न तो पद का घमंड दिखाई देता है और न ही जनता से दूरी; बल्कि वे एक ऐसे प्रशासक के रूप में पहचाने जाते हैं जो ज़मीनी स्तर पर उतरकर समस्याओं का समाधान करना पसंद करते हैं।चम्पावत जैसे पर्वतीय जिले में प्रशासन चलाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियाँ कठिन हैं और संसाधनों की सीमाएँ भी सामने रहती हैं। ऐसे में मनीष कुमार ने जिस प्रकार से अपनी सक्रियता और संवेदनशीलता का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। वे नियमित रूप से जनता दरबार, निरीक्षण और क्षेत्रीय भ्रमण के माध्यम से सीधे लोगों के बीच पहुँचते हैं। आम नागरिकों को यह अनुभव होता है कि उनकी बात सुनी जा रही है और उस पर कार्रवाई भी हो रही है। यही कारण है कि लोग अब अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के पास जाने में हिचकते नहीं, बल्कि विश्वास के साथ आगे आते हैं।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे छोटी से छोटी समस्या को भी नज़रअंदाज़ नहीं करते। चाहे वह सड़क की खराब स्थिति हो, पेयजल की समस्या हो, स्कूलों की व्यवस्थाएँ हों या स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी दिक्कतें—हर विषय पर उनकी पैनी नज़र रहती है। कई बार देखा गया है कि वे बिना किसी औपचारिकता के अचानक निरीक्षण पर पहुँच जाते हैं, जिससे संबंधित विभागों में सतर्कता बनी रहती है। यह उनके कार्य करने का व्यावहारिक तरीका है, जो केवल कागज़ी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक बदलाव लाने पर केंद्रित है।

लापरवाह अधिकारियों के प्रति उनका सख़्त रुख भी चर्चा का विषय बना रहता है। वे स्पष्ट शब्दों में यह संदेश देते हैं कि जनता के कार्यों में देरी या लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई अवसरों पर उन्होंने कार्य में कोताही बरतने वाले अधिकारियों को फटकार लगाई और आवश्यक निर्देश दिए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन बना रहे। यह सख़्ती नकारात्मक नहीं, बल्कि एक सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनती है, क्योंकि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। उनकी सादगी और विनम्रता भी उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है। अक्सर यह देखा जाता है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी आम जनता से दूरी बना लेते हैं, लेकिन उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। वे लोगों से सहजता से बात करते हैं, उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनते हैं और समाधान के लिए तत्पर रहते हैं। उनके व्यवहार में कहीं भी “मैं डीएम हूँ” जैसा अहंकार दिखाई नहीं देता, बल्कि वे खुद को जनता का सेवक मानकर कार्य करते हैं।उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता और तकनीक का उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और तेज़ बनाने के लिए उन्होंने आधुनिक साधनों और व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया है। शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के प्रयास किए गए हैं, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके साथ ही, विकास कार्यों की निगरानी भी नियमित रूप से की जाती है, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में ज़मीनी स्तर तक पहुँच सके।चम्पावत में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में भी उनकी सक्रिय भूमिका देखने को मिलती है। जिले की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया है। स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, युवाओं के लिए अवसरों का सृजन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। यह सब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके क्रियान्वयन पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है।उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने प्रशासन और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया है। आज चम्पावत में लोग प्रशासन को केवल एक व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि एक सहायक और सहयोगी के रूप में देखने लगे हैं। यह विश्वास किसी भी जिले के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है, और मनीष कुमार ने इसे अपनी मेहनत और ईमानदारी से अर्जित किया है।

समग्र रूप से देखा जाए तो मनीष कुमार एक ऐसे जिलाधिकारी के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली को मानवीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ा है। उनकी सख़्ती व्यवस्था को सुधारने के लिए है, उनकी सादगी लोगों को जोड़ने के लिए है, और उनकी सक्रियता विकास को गति देने के लिए है। चम्पावत की जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करता है, तो उसका प्रभाव दूर तक दिखाई देता है।

(लेखक लोहाघाट निवासी,सोशल मीडिया इनफ़्ल्यूएंसर एवं समसामयिक मुद्दों पर नियमित लिखते है)

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