Tuesday 23rd of June 2026

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लोहाघाट:ओवर स्पीड और लापरवाही बन रही है दुर्घटना का कारण। बापरू मे कलमठ में घुसी कार।

लोहाघाट:आदर्श चंपावत के लोहाघाट विधानसभा के सड़क विहीन शील गांव की दर्द भरी पुकार क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं

बाराकोट राजकीय अस्पताल के उच्चीकरण की मांग स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन

पिथौरागढ़ :आदलि कुशलि कुमाऊनी भाषा सम्मेलन मे भूपेन्द्र देव ‘ताऊ’ की पुस्तक ‘भविष्य का सौदा’ का विमोचन

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कुमाऊँ का डिजिटल बाज़ार: अब नौकरी, सेवाएँ, खरीद-बिक्री और मैट्रिमोनियल सब कुछ एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए KumaonBazaar.com तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह एक ऐसा लोकल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ नौकरी, बिज़नेस प्रमोशन, लोकल सेवाएँ, खरीद-बिक्री, पर्यटन और मैट्रिमोनियल जैसी कई सुविधाएँ एक ही जगह उपलब्ध हैं। Website: https://www.kumaonbazaar.com

आज के समय में लोग लोकल स्तर पर भरोसेमंद सेवाएँ और अवसर ढूँढना चाहते हैं। इसी जरूरत को समझते हुए KumaonBazaar.com ने कुमाऊँ के लोगों के लिए एक आसान और उपयोगी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है।

युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम

कुमाऊँ क्षेत्र के युवाओं को अक्सर नौकरी खोजने के लिए बड़े शहरों या कई अलग-अलग वेबसाइट्स पर निर्भर रहना पड़ता है। अब यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है क्योंकि KumaonBazaar Jobs Section पर लोकल और विभिन्न क्षेत्रों की जॉब्स उपलब्ध कराई जा रही हैं। Jobs Link: https://www.kumaonbazaar.com/jobs

यहाँ कंपनियाँ और बिज़नेस अपने जॉब पोस्ट कर सकते हैं, जबकि नौकरी तलाश रहे उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकते हैं। इससे लोकल टैलेंट को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

मैट्रिमोनियल सेवा से आसान रिश्ते

आजकल लोग सुरक्षित और भरोसेमंद मैट्रिमोनियल प्लेटफ़ॉर्म की तलाश में रहते हैं। KumaonBazaar Matrimony कुमाऊँ समाज के लोगों के लिए एक विशेष सुविधा लेकर आया है जहाँ परिवार अपनी प्रोफाइल बनाकर रिश्तों की तलाश कर सकते हैं। Matrimony Link: https://www.kumaonbazaar.com/matrimony

यह सेवा खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जो अपने समाज और क्षेत्र में अच्छे रिश्ते ढूँढना चाहते हैं।

लोकल सेवाओं और बिज़नेस को मिलेगा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कुमाऊँ के छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए KumaonBazaar Services एक बेहतरीन अवसर बनकर उभर रहा है। Services Link: https://www.kumaonbazaar.com/services

यहाँ इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, टूर सर्विस, एजेंसी, फ्रीलांसर, दुकानदार और अन्य सेवा प्रदाता अपनी सेवाओं को ऑनलाइन प्रमोट कर सकते हैं। इससे लोकल बिज़नेस को डिजिटल पहचान मिलने के साथ-साथ ग्राहकों तक पहुँचने में आसानी होगी। खरीद-बिक्री और लोकल विज्ञापन की सुविधा प्लेटफ़ॉर्म पर Buy & Sell सेक्शन भी उपलब्ध है जहाँ लोग अपने प्रोडक्ट्स या सामान को ऑनलाइन पोस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा बिज़नेस प्रमोशन और लोकल विज्ञापनों के लिए भी सुविधा दी जा रही है, जिससे छोटे व्यवसाय कम लागत में अपनी पहुँच बढ़ा सकते हैं। पर्यटन और लोकल जानकारी का भी केंद्र कुमाऊँ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। KumaonBazaar.com पर पर्यटन से जुड़ी जानकारी, होटल, ट्रैवल सेवाएँ और लोकल बिज़नेस की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को लाभ मिल सकता है। डिजिटल उत्तराखंड की ओर एक कदम डिजिटल इंडिया के दौर में लोकल प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ रही है। KumaonBazaar.com कुमाऊँ क्षेत्र के लोगों, युवाओं और व्यापारियों को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम कर रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म आने वाले समय में रोजगार, व्यापार और लोकल नेटवर्किंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:आदर्श चंपावत के लोहाघाट विधानसभा के सड़क विहीन शील गांव की दर्द भरी पुकार क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं

Laxman Singh Bisht

Tue, Jun 23, 2026

आदर्श चंपावत के लोहाघाट विधानसभा के सड़क विहीन शील गांव की दर्द भरी पुकार क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं

मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नहीं पहुंची सड़क 10 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण।

ग्रामीणों की मुख्यमंत्री, सांसद विधायक व डीएम चंपावत से गांव तक सड़क पहुंचाने की गुहार।

समय से अस्पताल न पहुंचने के कारण बच्चे की हो चुकी है मौत।

गर्भवती महिलाओं के जंगल में हो चुके हैं प्रसव के बावजूद भी नहीं ली जा रही सुध।

8 से 10 किलोमीटर पैदल चल बच्चे पहुंचते हैं स्कूल।

आज जहां देश चांद पर पहुंच चुका है पर वहीं आजादी के 76 साल बाद भी चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के शील गांव के ग्रामीण एक सड़क के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे हैं। पर 3 साल पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद आज तक गांव में सड़क नहीं पहुंच पाई है। जिसका खामियाजा ग्रामीण कई रूप में भुगत रहे है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , सांसद अजय टम्टा, विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, जिलाधिकारी चम्पावत, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग तथा उत्तराखंड सरकार से उनकी आवाज़ सुनने की गुहार लगाई है कहा क्या हम भारत के नागरिक नहीं है। शील के ग्रामीणों ने कहा। शायद हमारी यह पुकार उन लोगों तक पहुँच जाए जिनके हाथों में फैसले लेने की शक्ति है। कहा आज देश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। जगह जगह नई सड़कें बन रही हैं, नए शहर बस रहे हैं, नई योजनाएँ शुरू हो रही हैं। लेकिन हमारा गाँव आज भी सड़क व अन्य बुनियादी सुविधाओ का इंतजार कर रहा है जो देश के अधिकांश लोगों को वर्षों पहले मिल चुकी है सड़क। ग्रामीणों ने कहा सबसे दुखद बात यह है कि हमारे गाँव तक कच्ची सड़क भी नहीं है। आज भी हमें मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर पैदल जंगलों, पहाड़ों और कठिन रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यह केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि हमारे जीवन का रोज़ का संघर्ष है।जब सुबह बच्चे स्कूल के लिए निकलते हैं तो उनके सामने लंबा पैदल सफर होता है जंगली जानवरों का डर सताता है। जब बुजुर्गों को दवा की जरूरत पड़ती है तो उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जब किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने ले जाते हैं तो उन्हें अपनी उपज सिर और पीठ पर ढोकर ले जानी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा लेकिन सबसे दर्दनाक स्थिति तब होती है जब कोई बीमार पड़ जाता है। रात के अंधेरे में किसी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, किसी बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ जाए, किसी बच्चे को तेज बुखार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ जाए। उस समय हमारे पास एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकती कोई वाहन नहीं पहुँच सकता क्योंकि हमारे पास सड़क ही नहीं है।कई बार लोगों को चारपाई, डोली मे कंधों पर उठाकर जंगल और पहाड़ के रास्तों से दस किलोमीटर तक की खड़ी चढ़ाई पारकर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा यह केवल परेशानी नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष है। ग्रामीणों ने कहा शील गाँव के लोग भी इस देश के नागरिक हैं। हम भी टैक्स देने वाले किसानों, मजदूरों और मेहनतकश परिवारों का हिस्सा हैं। हमारे बच्चों के भी सपने हैं। हमारी माताओं और बुजुर्गों को भी सुरक्षित जीवन का अधिकार है।फिर आखिर क्यों हमारा गाँव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है?क्या पहाड़ में रहने वाले लोगों का जीवन कम महत्वपूर्ण है?क्या जंगल के बीच बसे गाँवों को विकास का अधिकार नहीं है?

क्या हमें केवल चुनाव के समय याद किया जाएगा? ग्रामीणों ने कहा हम किसी से विशेष सुविधा नहीं मांग रहे। बल्कि हम अपना अधिकार मांग रहे हैं हम केवल इतना चाहते हैं कि हमारे गाँव को भी सड़क से जोड़ा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ वहीकठिनाइयाँ न झेलें जो हम वर्षों से झेलते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा मुख्यमंत्री उत्तराखंड के विकास के लिए अनेक कार्य किए हैं। हमें विश्वास है कि यदि आपकी नजर हमारे गाँव की इस समस्या पर पड़ेगी तो अवश्य समाधान निकलेगा। जबकि आप सड़क की घोषणा तीन वर्ष पूर्ण कर चुके हैं। ग्रामीणों ने सांसद अजय टम्टा, विधायक लोहाघाट से कहा आप लोग क्षेत्र की आवाज़ हैं। हम आपसे निवेदन करते हैं कि एक बार ग्राम शील के लोगों की पीड़ा को समझिए। एक बार इस 10 किलोमीटर पैदल रास्ते मे चलकर देखिए। तब आपको एहसास होगा कि सड़क हमारे लिए सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी व संबंधित विभागों से अनुरोध करते हुए कहा शील गाँव का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क निर्माण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करें। कहा हम हाथ जोड़कर केवल इतना कहना चाहते हैं हमें दया नहीं, हमारा अधिकार चाहिए। हमें वादे नहीं, सड़क चाहिए। हमें आश्वासन नहीं, विकास चाहिए। कहा ग्राम शील की यह पुकार केवल सड़क की मांग नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की मांग है।"जब तक सड़क नहीं, तब तक विकास अधूरा है।"ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपनी घोषणा अनुरूप गांव तक सड़क पहुंचने की मांग की है। कहा चंपावत आदर्श जनपद तब कहलाएगा जब गांव गांव सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा स्वास्थ्य की सुविधा पहुंचेगी। देखने वाली बात यह है कि आज से तीन से चार वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा सील गांव तक सड़क बनाने की घोषणा की गई थी जो फिलहाल अभी तक घोषणा ही साबित हो रही है। समय से अस्पताल न पहुंचने के कारण एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है पर उसके बावजूद शासन प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब देखना है सरकार कब ग्रामीणों की सुध लेती है।

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