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: देहरादून:प्रदेश भर के अतिथि शिक्षक आंदोलनरत दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित

Laxman Singh Bisht

Fri, Aug 2, 2024
प्रदेश भर के अतिथि शिक्षक आंदोलनरत दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित शुक्रवार 2 जुलाई से प्रदेश के विभिन्न दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों में तैनात 4000 गेस्ट टीचर हड़ताल में चले गयें हैं, जिससे पहाडों के लगभग सारे स्कूल खाली हो गयें हैं, तथा पहाड़ के बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गयी है, क्योंकि दुर्गम स्कूलों की रीढ़ यही गेस्ट टीचर हैं, जिन्होंने पिछले 9 साल से पढ़ाई का जिम्मा संभालते हुए बच्चों का भविस्य बनाया है, परंतु आज खुद इनका भविस्य अंधकारमय है,तबादले से लगभग 2000 गेस्ट टीचर प्रभावित हुए हैं जो कि दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इनको जून माह का वेतन तक नहीं दिया गया है,ना ही सरकार इनके भविष्य के बारे में कोई नीति बनाती है। अतिथि शिक्षकों ने कहा विभाग के मंत्री धन सिंह रावत कहते हैं कि इनकी सभी वाजिब मांगो को सुना जाता है तथा कार्यवाही की जाती है,जबकि सच्चाई ये है कि 2021 में वेतन बढ़ोतरी के अलावा इस सरकार में कोई कार्य नहीं हुआ तब भी अरविन्द पांडेय विभाग के मंत्री थे,अतिथि शिक्षक संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि मंत्री जी हमेशा हमारी मांगों पर तुरंत प्रस्ताव भेजो ऐसा आदेश देते हैं,निदेशालय के अधिकारी बताते हैं कि आपका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है,कार्य हो रहा है।विगत 3 साल से यही चल रहा है,कार्य कोई नहीं होता। वेतन बढ़ोतरी और पद सुरक्षित तो दूर की बात है, जून माह का वेतन भी नहीं दिया जा रहा है जो कि 09 साल से लगातार मिल रहा था। इन्ही सब मनमानियों के कारण सारे गेस्ट टीचर आज से अनिश्चितकालीन धरने पे चले गए हैं। पहाड़ के सारे टीचर द्वारा अपने प्रधानाचार्य को धरने का नोटिस दे दिया गया है, जिस कारण पहाड़ों की पढाई बाधित हो गयी है, जो परमानेंट टीचर थे वो अपने तबादलों में इधर उधर हैं,गेस्ट टीचर कार्यबहिष्कार में हैं, ऐसे में दुर्गम के बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा,यह सब देखते हुए अभिभावक भी चिंतित हैं,बहुत सी जगह अभिभावक भी टीचर नियुक्त करने को लेकर धरने पे बैठे हैं,अगर यह आंदोलन लंबा चलता है और पढ़ाई  लगातार बाधित होती है तो,कही अतिथि शिक्षकों का यह आंदोलन एक जनांदोलन का रूप ना ले ले। अतः सरकार को चाहिए कि अतिथि शिक्षकों की जो मांगे है उनपर कार्यवाही करते हुए जितनी जल्दी हो सके इस आंदोलन को समाप्त करवाना चाहिए,ताकि दुर्गम और अति दुर्गम के बच्चों की  पठन-पठान प्रभावित ना हो।

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