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रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : देहरादून:नस्लीय हिंसा के शिकार हुए त्रिपुरा के छात्र की मौत के बाद पूर्वोत्तर के छात्रों में आक्रोश

Laxman Singh Bisht

Sun, Dec 28, 2025

नस्लीय हिंसा के शिकार हुए त्रिपुरा के छात्र की मौत के बाद पूर्वोत्तर के छात्रों में आक्रोश

सेलाकुई थाने पहुंचा पूर्वोत्तर के छात्र छात्राओं का दल कार्यवाही की मांग।प्रदेश की राजधानी देहरादून में नस्लीय हिंसा का शिकार हुए त्रिपुरा के एक छात्र की जिंदगी और मौत से जूझते हुए 17 दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। 24 वर्षीय एमबीए के छात्र एंजेल चकमा की मौत के बाद पूर्वोत्तर के छात्रों में आक्रोश है। पूर्वोत्तर के छात्र संगठन अब आंदोलन करते नजर आ रहे हैं। कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं।तो वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने बीती 23 दिसंबर को उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर घटना में पुलिस की लापरवाही की शिकायत की है आयोग के पत्र मिलने के बाद ही पुलिस ने इस मामले में हत्या की धारा की बढ़ोतरी की है। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के नंदानगर निवासी छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय हिंसा की वजह से हुईं मौत के बाद सोशल मीडिया पर एंजेल को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन शुरू हो चुके हैं जिसके लिए देहरादून से त्रिपुरा समेत अलग-अलग शहरों में एंजेल चकमा की मौत पर उनके मित्र उन्होंने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे है।घटना बीती 9 दिसंबर की है जब एक स्थानीय कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई करने वाले 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा को कुछ छात्रों ने नस्लीय टिप्पणी का विरोध करने पर बहसबाजी के बाद धारदार हथियारों से हमला कर जख्मी कर दिया। जिसके बाद एंजेल चकमा के भाई माइकल चकमा ने गंभीर हालत में घायल छात्र को ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां लंबे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले मे छात्र के भाई माइकल चकमा ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया की बीती 9 दिसंबर को वो अपने भाई के साथ शाम के समय सेलाकुई में खरीदारी कर रहे थे।इस दौरान नशे में धुत कुछ छात्र उनके साथ जाति सूचक शब्दों सहित नस्लीय टिप्पणी करने लगे। जिसका विरोध करने पर जब छोटे भाई माइकल चकमा पर कड़े से वार किया तो बड़े भाई ने विरोध करते हुए अपने भाई का बचाव करना चाहा। इसी दौरान नशे में धुत आरोपी छात्रों ने छात्र एंजेल चकमा पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर डाले जिसके बाद गंभीर हालत में घायल इस छात्रा को धूलकोट में मौजूद ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां जिंदगी और मौत से लड़ते हुए घटना के 17 दिन बाद छात्र की मौत हो गई.।वहीं इस गंभीर मामले में पुलिस ने घायल छात्र के भाई माइकल चकमा की तहरीर पर 12 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया और सीसीटीवी की मदद से आरोपियों को चिन्हित कर 14 दिसंबर को 5 आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।जबकि इस मामले मे एक आरोपी नेपाल भाग चुका है जिसे पकड़ने के लिए पुलिस ने टीम गठित करने के साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी पर 25 हजार रूपये का इनाम घोषित किया है।लेकिन छात्र की मौत के बाद अब इंसाफ की मांग को लेकर इस मामले की गूंज सोशल मीडिया से धरातल पर उतर आई है। जिसे लेकर देश में जगह-जगह ऐंजल चकमा के लिए इंसाफ और अपने ही देश में भारतीय होते हुए भी नस्लीय टिप्पणियों बंद कराने की मांग की जा रही है। वहीं ऐंजल चकमा की मौत के बाद उनके सहयोगियों और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों ने पूर्वोत्तर छात्र संगठन के बैनर तले देहरादून में कैंडल मार्च निकाला गया। जिसके बाद उनके इस जत्थे ने आज सेलाकुई थाने पहुंच मामले में चल रही पुलिस प्रक्रिया की जांच की है।इस दौरान पूर्वोत्तर के छात्रों का कहना है कि अगर देहरादून जैसे शिक्षा के हब में उन्हें सुरक्षा का एहसास नहीं मिलेगा तो पूर्वोत्तर के छात्र देहरादून का बायकोट कर देंगे। जबकि पूर्वोत्तर छात्र संगठन अध्यक्ष रिषिकेश ने अपने ही देश में नस्लीय टिप्पणियां खत्म करने और बाहरी राज्यों के छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हुए अपने सपनों को लेकर उत्तराखंड में शिक्षा ग्रहण करने के लिए यहां पहुंचने वाले छात्रों की सुरक्षा की मांग की गई।

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