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लोहाघाट पाटन में सजी सुरों की महफिल, कुमाऊंनी गीतों से गूंज उठी सांस्कृतिक संध्या

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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट पाटन में सजी सुरों की महफिल, कुमाऊंनी गीतों से गूंज उठी सांस्कृतिक संध्या

Laxman Singh Bisht

Tue, Aug 25, 2026

लोहाघाट पाटन में सजी सुरों की महफिल, कुमाऊंनी गीतों से गूंज उठी सांस्कृतिक संध्या

लोहाघाट। ग्राम पाटन पाटनी के कनेडा स्थित मधुधाम में डॉ. हरीश चंद्र पाठक के आवास पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में गीत-संगीत और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। देर शाम शुरू हुए इस आयोजन में क्षेत्र के साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ऐसा रंग जमाया कि उपस्थित लोग देर तक गीतों की स्वर लहरियों में डूबे रहे।कार्यक्रम की शुरुआत गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के साथ हुई। निशांत पुनेठा, संजय पंत, रमेश जोशी, जगदीश खर्कवाल, ललित मोहन, हरीश बगोली,समृद्धि जोशी एवं जानकी ने विभिन्न गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से संगीत की विविधता और स्थानीय प्रतिभाओं की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की।सांस्कृतिक संध्या में कुमाऊंनी लोकगीतों ने विशेष आकर्षण पैदा किया।

अनिरुद्ध पाठक, प्रेरणा कर्नाटक एवं प्रज्ञा कांडपाल ने कई कुमाऊंनी गीत प्रस्तुत किए। पहाड़ की मिट्टी, परंपरा, रिश्तों और लोकजीवन से जुड़े इन गीतों ने लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ दिया। कुमाऊंनी गीतों की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित लोगों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और तालियों से उनका स्वागत किया।इस अवसर पर भगवत प्रसाद पांडे, कीर्ति बगोली, शशांक पांडे ,पूरन पाटनी,रजत जोशी, महेंद्र अधिकारी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे। सभी ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। कुमाऊंनी लोकगीत में उत्तराखंड की सामाजिक परंपराओं, लोकजीवन, रिश्तों और पहाड़ की संवेदनाओं की झलक मिलती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलता है और लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़ने का मंच मिलता है।

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