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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : बाजपुर चीनी मिल मे भ्रष्टाचार का खुलासा तीन अधिकारी निलंबित, भर्जी भुगतान किये जाने के आरोप ।

Laxman Singh Bisht

Sat, Feb 14, 2026

बाजपुर चीनी मिल मे भ्रष्टाचार का खुलासा तीन अधिकारी निलंबित, भर्जी भुगतान किये जाने के आरोप ।

बाजपुर चीनी मिल एक बार फिर से चर्चाओ में बनी हुई है । फर्जी तरीके से किसानों के लाखो रुपये हड़प लिए गए अधिकारी जब मामले की जाँच हुई तो अनेकों फर्जीबाडे खुलकर सामने आये जिसके चलते तत्कालीन प्रभारी मुख्य गन्ना अधिकारी राजीव कुमार, प्रभारी मुख्य लेखाकार बीर सेन राठी तथा चीनी मिल की प्रभारी ज्येष्ठ गन्ना विकास अधिकारी दीपिका द्वारा वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किये जाने पर तीनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबित कर अलग-अलग चीनी मिलों में सम्बद्ध कर दिया गया । चीनी मिल प्रभारी प्रबंधक डॉ अमृता शर्मा ने भी मामले की पुष्टि की है । वर्ष 2022-23 के दौरान गन्ना बीज खरीद, परिवहन और भुगतान में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला जांच में उजागर होने के बाद पूरे तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। लंबे समय तक दबे रहे इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच पूरी होने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए बाजपुर चीनी मिल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अलग-अलग चीनी मिलों में सम्बद्ध कर दिया गया है। इससे पूर्व गन्ना आयुक्त स्तर की हुयी जांच में प्रकरण से जुड़े गन्ना विकास समिति बाजपुर के तत्कालीन ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक इब्राहिम और गन्ना सुपरवाइजर रामपाल को भी निलंबित किया जा चुका है। मामले का खुलासा तब हुआ जब क्षेत्र के जागरुक किसान नेता, बलदेव सिंह ने समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए गन्ना बीज की कीमत में भारी अंतर पाए जाने की शिकायत दर्ज कराई। उनके द्वारा आरोप लगाया गया कि निर्धारित दर 345 व 355 रुपये प्रति कुंतल होने के बावजूद किसानों से 800 रुपये प्रति कुंतल तक की कटौती कर ली गई। शिकायत के बाद गन्ना आयुक्त स्तर से जांच कराई गई जिसमें सामने आया कि जिस गन्ना बीज को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से लाया जाना दर्शाया गया था, वह वास्तव में वहां से आया ही नहीं था।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि गन्ना बीज कटाई और लदाई के कार्य के कोई बिल प्रस्तुत किए बिना ही 4,07,002 रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच समिति ने इसे स्पष्ट रूप से फर्जी भुगतान मानते हुए मिल को आर्थिक क्षति पहुंचाने की पुष्टि की है।

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