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चम्पावत : मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष मे आरटीआई मांगने पर नरेंद्र उत्तराखंडी ने जान से मारने की धमकी मिलने के

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चम्पावत : मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष मे आरटीआई मांगने पर नरेंद्र उत्तराखंडी ने जान से मारने की धमकी मिलने के

Laxman Singh Bisht

Thu, Apr 9, 2026

चम्पावत : मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष मे आरटीआई मांगने पर नरेंद्र उत्तराखंडी ने जान से मारने की धमकी मिलने के लगाए आरोप

चम्पावत जनपद में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष वितरण पर राजनीति गरमाई हुई है तथा कई भाजपा के दिग्गज नेताओं का नाम सामने आया है। वही मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगना सबका विकास पार्टी के अध्यक्ष नरेंद्र उत्तराखंडी को भारी पड़ता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगने के बाद उसे सत्ताधारी दल के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा जान-माल की धमकियां दी जा रही हैं ।शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक पत्र में दावा किया गया है कि उसने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विवेकाधीन राहत कोष के लाभार्थियों की जानकारी मांगी थी । इसके बाद से ही उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं , हालांकि पत्र में नाम का जिक्र नहीं किया गया है । पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ लोग न केवल धमकी दे रहे हैं , बल्कि सार्वजनिक रूप से उत्तराखण्डी चोर है जैसे आपत्तिजनक नारे भी लगा रहे हैं , जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है । शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहत कोष का बड़ा हिस्सा आम जनता के बजाय एक विशेष राजनीतिक वर्ग - भाजपा कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में बांटा गया है । शिकायतकर्ता का कहना है कि चंपावत विधानसभा क्षेत्र में लगभग 80% राशि पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित रही ।मामले को और गरमाते हुए शिकायतकर्ता ने सुझाव दिया है कि आगामी विधानसभा सत्र में एक विधेयक लाकर विवेकाधीन राहत कोष का नाम बदलकर भाजपा राहत कोष कर दिया जाए , ताकि पारदर्शिता पर सवाल न उठें ।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उसे धमकी देने वाले कार्यकर्ताओं से सुरक्षा प्रदान की जाए , ताकि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रख सके । इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है । अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर आरोप और धमकियों के मामले में क्या कदम उठाते हैं ।

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