रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:कुमाऊनी परंपराओं की ध्वजवाहक बनी गौरव की बर्यातअपनी भाषा में छपवाया आमंत्रण कार्ड
Laxman Singh Bisht
Fri, May 15, 2026
कुमाऊनी परंपराओं की ध्वजवाहक बनी गौरव की बर्यातअपनी भाषा में छपवाया आमंत्रण कार्ड
छलिया ने बजाया बैंडबाजे का बाजा
मेंहदी में काकटेल को इंकार, भजन कीर्तन की बही बयार
नशा मुक्ति का दिया संदेश
पारंपरिक रसोई में बनी दाल-भात संग खीर।
सीएम धामी ने भी की सराहना

चम्पावत(उत्तराखंड) : बदलते दौर में जहां शादी धूम धड़ाका, मौज मस्ती और काकटेल का पर्याय बनते जा रहे है। वहीं चम्पावत मुख्यालय में वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडेय के ज्येष्ठ पुत्र और भाजयुमो के प्रदेश संयोजक गौरव पांडेय की बर्यात कुमाऊँनी परंपरा की ध्वजवाहक साबित हुई है। इस समारोह में पाणिग्रहण संस्कार का हर मांगलिक कार्य वैदिक मंत्रों के बीच पूर्ण विधि विधान से संपंन्न हुए और हरतरह का नशा पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। आमंत्रण पत्र से लेकर हल्दी,मेंहदी, भोज और कथा के कार्यक्रम में कुमाऊँनी रीतरिवाजों की ही प्रमुखता रही।आमंत्रण पत्र को अपनी बोली भाषा में छपवा कर सबसे पहले श्रीगणेश और ईष्टदेवी देवताओं के पूजा स्थलों में भेजा गया। ब्या बर्यात की सभी रस्मों का श्रीगणेश शुगुन आंखर के साथ हुआ।वर को हल्दी लगाने की रस्म रंग्याली पिछौड़ी से सिर ढककर लाने से शुरु हुई।

मेंहदी के आयोजन में काकटेल(नशा) का पूरी तरह बायकाट कर डीजे संगीत के बजाय भजन संध्या में भजन कीर्तन से भक्ति की बयार बही और रात दो बजे तक महिला और बच्चे भी भक्तिरस में सराबोर रहे। पानी परखने, भाभी के काजल लगाने और मां के दूध के फर्ज अदा करने की रस्मों के साथ कुमाऊँनी ढोल दमू की धुनपर छलिया नृत्य से बर्यात का प्रस्थान और आगमन हुआ। पाणिग्रहण संस्कार के दौरान धुलिग्रह, गोत्राचार, गोठको ब्या, फेरे, शय्यादान, लक्ष्मी नारायण की पूजा वैदिक व पारंपरिक तौर पर संपन्न हुए।ब्या भात यानि प्रीतिभोज में पारंपरिक रसोई में पंडितों ने भोजन बनाया जिसमें भड्डू की दाल, भात, खीर के साथ स्थानीय व्यंजन परोसे गए।महिला संगीत में वर वधू को पिठ्यां लगाने, दक्षिणा देने और उपहारों का स्थानीय परंपरा के तहत आदान प्रदान करने और श्री सत्यनारायण की कथा के बाद बर्यात संपन्न हुई।पांच दिन बाद दुनगौन की रस्म, ईष्टदेव पंचबलिया में पूजा अर्चना, देवी पाठ के साथ शादी समारोह का विधिवत समापन हुआ।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अपनी बोली भाषा में छपे आमंत्रण पत्र के साथ ही कुमाऊँनी परंपरा, अपनी संस्कृति सभ्यता को आगे बढाने के प्रयासों को लेकर परिजनों से वार्ता कर गौरव की बर्यात की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए सराहना की है।
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