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लोहाघाट में आलू बुवाई जोरों पर उद्यान विभाग उपलब्ध करा रहा है बीज।

रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट में आलू बुवाई जोरों पर उद्यान विभाग उपलब्ध करा रहा है बीज।

Laxman Singh Bisht

Tue, Feb 10, 2026

लोहाघाट में आलू बुवाई जोरों पर उद्यान विभाग उपलब्ध करा रहा है बीज।

आलू बुवाई में महिलाएं निभा रही है महत्वपूर्ण भूमिका।आलू की खेती में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर किसान विभाग से कर सकते हैं संपर्क :जिला उद्यान अधिकारीलोहाघाट ।चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र में आजकल आलू की बुवाई काफी जोर शोर से चल रही है। जिले के लोहाघाट क्षेत्र के कोली ढेक , बिसंग, रायनगर चौड़ी ,सुई ,क कलीगांव,फोर्ती आदि क्षेत्रों में किसानों के द्वारा बड़ी तादाद में आलू की बुवाई की जा रही है। आलू बुवाई में महिलाओं के द्वारा अपना बहुमूल्य सहयोग दिया जा रहा है।जहां महिलाएं खुद पावर ट्रेलर चलाकर आलू के लिए खेत तैयार कर रही हैं और समूह में आलू की बुवाई कर रही है। हालांकि कुछ किसानों के द्वारा बैलों के माध्यम से भी खेतों की जुताई की जा रही है पावर ट्रेलर आने से अब गांव में काफी कम तादात में हल बैल देखने में नजर आते है किसी समय हल बैल रोजगार का एक सशक्त माध्यम होता था।जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली ने बताया आजकल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में आलू बुवाई जोरों पर है ।उन्होंने कहा विभाग के द्वारा किसानों को उचित दरों पर आलू का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा इस बार विभाग के द्वारा प्रयोग के तौर पर विदेशी बेगनी आलू कुछ किसानों को उपलब्ध कराया गया है अगर इसके परिणाम अच्छे निकले तो अगले वर्ष से बड़ी तादात में बैगनी आलू की खेती भी जिले में की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के समस्त आलू उत्पादकों से किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उनसे या उद्यान प्रभारी से संपर्क करने की अपील की है ।उन्होंने कहा विभाग किसानों की भरपूर मदद करेगा।वही कोली ढेक क्षेत्र के आलू उत्पादक गिरीश ढेक ,प्रकाश ढेक ,श्रीमती गंगा ढेक,बृजेश जोशी ,मानसिंह आदि ने बताया वर्तमान में सरकार के द्वारा उन्हें समिति के माध्यम से आलू के बीज के लिए ऋण उपलब्ध कराया गया है तथा उद्यान विभाग के द्वारा उन्हें बीज उपलब्ध कराया जाता है। कहा पर्वतीय क्षेत्र की खेती बारिश पर निर्भर रहती है अगर समय से बारिश होगी तो उनकी आलू की पैदावार बंपर होगी। कहा आलू की खेती इस क्षेत्र के किसानों की आर्थिकी की रीड की हड्डी मानी जाती है। पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध न होने के कारण समय पर बारिश न होने के कारण किसानों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है ।इसके अलावा जंगली जानवरों के द्वारा भी आलू की खेती को काफी नुकसान पहुंचाया जाता है। किसानों ने शासन प्रशासन से चकबंदी सुरक्षा घेरबाढ़ व सिंचाई व्यवस्था करने तथा पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए और अधिक सुविधा बढ़ाने की मांग की है। आजकल जहां प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र के गांवो मे जंगली जानवरों व समस्याओं से होने वाले पलायन के कारण खेती का दायरा सीमित हो चुका है ।कई लोगों ने खेती बाड़ी करना व पशुओं को पालना छोड़ दिया है ।पर लोहाघाट के इन क्षेत्रों में आज भी किसान खेती व पशुपालन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

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