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: लोहाघाट:आइटीबीपी लोहाघाट ने मिशन लाइफस्टाइल फॉर इन्वायरमेंट के तहत चलाया जागरूकता अभियान

Laxman Singh Bisht

Fri, May 17, 2024
आइटीबीपी लोहाघाट ने मिशन लाइफस्टाइल फॉर इन्वायरमेंट के तहत चलाया जागरूकता अभियान लोहाघाट मनुष्य का जब तक प्रकृति से अटूट रिश्ता बना हुआ था ,तब तक पर्यावरण की कोई समस्या पैदा ही नहीं हुई, जबसे मनुष्य ने प्रकृति से अपना रिश्ता तोड़ कर उससे लालच करना शुरू किया, तभी से प्रकृति ने अपना स्वभाव ही बदल दिया है! यदि समय रहते हमारी चेतना जागृत नहीं हुई तो हम भावी पीढ़ी के लिए हरे भरे जंगलो के स्थान पर नंगे पहाड़ व रेगिस्तान विरासत में छोड़ जायेंगे! यह बात आईटीबीपी की 36वीं वाहिनी के कमांडेंट डीपीएस रावत ने वाहिनी द्वारा संचालित "मिशन लाईफ स्टाईल फार इन्वायरमेंट'" कार्यक्रम के तहत जन जागरूकता अभियान के दौरान व्यक्त किये! उन्होंने कहा गंगा यमुना का उदगम हिमालयी क्षेत्र में आज एक एक बूंद पानी के लिए हम सब तरस रहे हैं , इसका कारण मनुष्य का वह लालच है, जिसने अपने थोडे़ से लाभ के लिए प्रकृति के श्रंगार उन पेड़ों को निर्ममता से उजाड़ दिया, जो जन्म से लेकर मृत्यु तक हमसे परछाई की तरह आत्मसात करते आ रहे हैं! कमांडेंट ने बड़े मार्मिक एवं भावुक अंदाज में कहा जंगलों में आग लगाकर हम अपने उन पूर्वजों की भावनाओं व उनके सम्मान को आघात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्होने विरासत में यह जंगल हमें दिये थे कि हम भी इन्हें सुरक्षित रखते हुए पीढ़ी दर पीढ़ी इस स्वस्थ्य परंपरा के संवाहक बने रहें ! उन्होंने कहा कि जंगलों को आग के हवाले कर हम प्रकृति को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं, उसकी भरपाई में बहुत लंबा समय लगेगा! देवभूमि में जंगली आग से वन्य जीवों का जो संसार समाप्त होता जा रहा है, इस अभिशाप से मनुष्य अपने आप को कैसे बचायेगा, यह एक हर वक्त सोचने का विषय बन गया है! मौसम चक्र में बदलाव आने से समय से वर्षा न होना, बाढ़, भू-स्खलन, गंभीर जल संकट आदि का अभिशाप झेलना मनुष्य इसे नियति का चक्र मान बैठा है,जबकि इसके लिए हम सब गुनाहगार है, उन्होंने दावा किया कि प्रकृति से आत्मसात कर अपनी लाईफ स्टाईल बनाने से व्यक्ति कभी बीमार हो ही नहीं सकता, प्रकृति के बीच रहने से हमारे विचार ही बदल जाते हैं यह प्रकृति द्वारा हमें वरदान मिला है! इस अवसर पर उन्होंने सुई से गलचौडा तक बाईक रैली में शामिल होकर लोगों को संदेश दिया कि " हमारा जीवन तभी तक सुरक्षित है, जब तक पर्यावरण स्वस्थ्य रहेगा! जागरुकता रैली में सभी हिमवीरों, नागरिकों के अलावा डा.अशोक एरन, उप सेनानी राजेश मीणा, आर के बोहरा, सहायक सेनानी जीबी जोशी, सुखपाल सिंह, जगदीश प्रसाद चंदौलिया , विकास दहिया आदि अधिकारी भी शामिल थे!

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