रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : खेतीखान:उत्तराखंड की भिटौली परंपरा पहुंची जर्मनी तक कार्तिक स्वीट होम की खोये की बर्फी को लोगों ने किया पसन्द ।
Laxman Singh Bisht
Tue, Apr 7, 2026
उत्तराखंड की भिटौली परंपरा पहुंची जर्मनी तक कार्तिक स्वीट होम की खोये की बर्फी को लोगों ने किया पसन्द ।

भिटौली उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र की एक प्राचीन परंपरा है, जो चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में मनाई जाती है। इसमें भाई या माता-पिता अपनी विवाहित बहन बेटी के घर जाकर उन्हें नए वस्त्र, पारंपरिक पकवान (जैसे पूड़ी, पुवे), और फल उपहार में देते हैं, जो मायके के स्नेह और बहन से उनके अटूट रिश्ते का प्रतीक है।आधुनिक समय में अब भिटौली डिजिटल हो रही है, जहाँ लोग यूपीआई (Google Pay, PhonePe) या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से भी यह रस्म पूरी कर रहे हैं। लेकिन पहाड़ की संस्कृति की मिठास और भाई-बहन का पवित्र प्रेम अभी बना हुआ है। चम्पावत के खेतीखान से एक भाई ने जर्मनी तक अपनी बहन के लिए कार्तिक स्वीट होम खेतीखान की पहाड़ी खोये से बनी बर्फी भेजी । तो जर्मनी के लोगों ने परम्परा के साथ शुद्ध खोये से बनी बर्फी को बहुत पसंद कर इसकी सराहना की । साथ ही कार्तिक स्वीट होम के ऑनर से 5 किलों बर्फी की अलग से डिमांड कर डाली । कार्तिक स्वीट होम के ऑनर बसन्त ओली बताते है कि भिटौली उत्तराखंड की एक परम्परा है । लेकिन इसमें बदलाव जरूर आ गए लोग हाइटेक हो गए ।

लेकिन मिठास अभी बरकरार है वह बताते है कि अभी भी लोग भिटौली में मिठाई ले जाना नही छोड़ते। जिससे चैत्र मास में मिठाई की डिमांड बढ़ जाती है । उनके यहाँ प्रतिदिन शुद्ध पहाड़ी खोये से बने लड्डू की कुन्तलों के हिसाब से मांग रहती है मगर वह पूरा नही कर पाते । इसके साथ ही बर्फी , लॉज बाल मिठाई व गुलाब जामुन भी वह शुद्ध खोये से तैयार करते है । उनका कहना है कि उत्पाद में विश्वसनीययता व शुद्धता हो तो स्थान मायने नही रखता ।
