Thursday 16th of July 2026

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बाराकोट:मां की जान बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई थी जीआईसी मऊ की छात्रा ज्योति वीरता के लिए हुई सम्मानित।

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रिपोर्ट:जगदीश जोशी : बाराकोट:मां की जान बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई थी जीआईसी मऊ की छात्रा ज्योति वीरता के लिए हुई सम्मानित।

Laxman Singh Bisht

Thu, Jul 16, 2026

मां की जान बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई थी जीआईसी मऊ की छात्रा ज्योति वीरता के लिए हुई सम्मानित।

गुलदार से बचाई थी मां की जान गुलदार से लड़ते खुद हो गई थी गंभीर रूप से घायल

विकासखण्ड बाराकोट के दूरस्थ विद्यालय राजकीय इण्टर कॉलेज मऊ, जनपद चम्पावत की कक्षा 12 की छात्रा कुमारी ज्योति को उनकी अदम्य वीरता और साहस के लिए शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया।शिक्षक ऋतेश कुमार वर्मा ने बताया कि 15 अप्रैल 2026 को सायं लगभग 5:30 बजे ज्योति अपनी माता एवं अन्य लोगों के साथ खेत में कार्य कर रही थी। इसी दौरान अचानक एक गुलदार ने उसकी माता पर हमला कर दिया। संकट की इस घड़ी में ज्योति ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए हाथ में दरांती लेकर शोर मचाया और गुलदार का डटकर सामना किया। अपनी माता एवं अन्य लोगों की जान बचाने के प्रयास में वह स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बाद उसका लगभग दो माह तक उपचार चला।स्वस्थ होने के उपरान्त 15 जुलाई 2026 को विद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में जिलाधिकारी मनीष कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी मान सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी कमल भट्ट एवं प्रधानाचार्य शमशाद अली ने छात्रा ज्योति को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्रदान कर उसके अद्वितीय साहस की सराहना की।इस अवसर पर राज्य दर्जा मंत्री श्याम नारायण पाण्डेय, सतीश चन्द्र पाण्डेय, निर्मल मेहरा, ब्लॉक प्रमुख सीमा विश्वकर्मा, कनिष्ठ प्रमुख केशव देवी, ग्राम प्रधान मऊ तुलसी देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मोहन सिंह, जिला पंचायत सदस्य (फरतोला) योगेश जोशी सहित विद्यालय के शिक्षक मनोज कुमार सिंह, ऋतेश कुमार वर्मा, रीतू गोस्वामी, अंजू फर्त्याल, अरिमर्दन सिंह, रंजीत सिंह, जनार्दन प्रसाद, जगदीश चन्द्र जोशी, स्निग्धा कन्याल, ज्योति राणा, राजेन्द्र नाथ, मोहन चन्द्र, गणेश चन्द्र भट्ट, सुरेश लाल, प्रताप सिंह एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।ज्योति की बहादुरी और साहस की यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है तथा यह संदेश देती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और सूझबूझ से बड़ा से बड़ा संकट टाला जा सकता है।

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