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पांच साल बेमिसाल:स्थिर नेतृत्व और नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनी धामी सरकार। धामी सरकार के 5 साल पूरे

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : पांच साल बेमिसाल:स्थिर नेतृत्व और नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनी धामी सरकार। धामी सरकार के 5 साल पूरे

Laxman Singh Bisht

Sat, Jul 4, 2026

पांच साल बेमिसाल:स्थिर नेतृत्व और नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनी धामी सरकार। धामी सरकार के 5 साल पूरे

एन0 डी0 तिवारी के बाद प्रदेश के 5 साल तक मुख्यमंत्री बने रहने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने सीएम धामी।

उत्तराखंड की राजनीति लंबे समय तक नेतृत्व परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता के लिए चर्चा में रही। राज्य गठन के बाद पूर्व सीएम एन 0डी 0तिवारी के अलावा शायद ही कोई मुख्यमंत्री अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर पाया। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का लगातार पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करना केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बाद धामी राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं

जिन्होंने सफलतापूर्वक पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। साथ ही, वे उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने लगातार पाँच वर्षों तक सरकार का नेतृत्व किया है। 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले पुष्कर सिंह धामी ने युवा नेतृत्व, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासनिक सक्रियता को अपनी कार्यशैली का आधार बनाया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में व्यक्तिगत रूप से चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा और दोबारा मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी।

यह विश्वास उनके नेतृत्व और संगठनात्मक स्वीकार्यता का प्रमाण माना गया। धामी सरकार के पाँच वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐसे निर्णय देखे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। भूमि कानून में संशोधन कर पर्वतीय क्षेत्रों की भूमि सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। नकल विरोधी कानून के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता स्थापित करने का प्रयास किया गया।

सख़्त धर्मांतरण विरोधी कानून, महिला आरक्षण, जन-जन की सरकार कार्यक्रम, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त किया,निवेश, पर्यटन, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, आधारभूत संरचना के विस्तार तथा रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में भी धामी सरकार ने अनेक पहल की हैं।निस्संदेह, किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों से नहीं होता। बेरोज़गारी, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता और आपदा प्रबंधन जैसे विषय आज भी गंभीर चुनौतियाँ बने हुए हैं। विपक्ष समय-समय पर इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता रहा है। लोकतंत्र की यही विशेषता है कि उपलब्धियों के साथ कमियों पर भी समान रूप से विमर्श हो।

फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि पाँच वर्षों का स्थिर नेतृत्व उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत युवा राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है। बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की राजनीति से निकलकर राज्य ने प्रशासनिक निरंतरता का अनुभव किया है। इससे नीतियों के क्रियान्वयन और दीर्घकालिक विकास योजनाओं को गति मिली है।धामी सरकार के पाँच वर्ष केवल एक राजनीतिक पड़ाव नहीं, बल्कि उत्तराखंड की शासन व्यवस्था में स्थिरता, निर्णय क्षमता और नई कार्यसंस्कृति के प्रतीक के रूप में देखे जा सकते हैं।

अब जनता की अपेक्षाएँ भी पहले से अधिक हैं। आने वाले वर्षों में सरकार की वास्तविक परीक्षा इस बात से होगी कि विकास का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुँचता है और पहाड़ की चुनौतियों का कितना स्थायी समाधान निकलता है।पाँच वर्ष पूरे होने का यह अवसर उपलब्धियों का उत्सव अवश्य है, लेकिन साथ ही भविष्य की जिम्मेदारियों को भी स्मरण कराता है। उत्तराखंड की जनता अब केवल वादों से नहीं, बल्कि परिणामों से विकास का आकलन करेगी।

यही किसी भी सफल लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी कसौटी होती है। सफलतम कार्यकाल के लिए काली कुमाऊं खबर व पर्वत प्रेरणा की ओर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री,पुष्कर सिंह धामी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

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