Sunday 9th of August 2026

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : नोएडा:इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में पुलिस ने बिल्डर को किया गिरफ्तार।

Laxman Singh Bisht

Tue, Jan 20, 2026

इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में पुलिस ने बिल्डर को किया गिरफ्तार।उत्तर प्रदेश: नोएडा के सेक्टर-150 में बेसमेंट के पानी में डूबकर हुई इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले में संज्ञान लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है, लेकिन अब भी बड़ा सवाल कायम है कि इंजीनियर की मौत के अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब।सेक्टर-150 में एक मॉल के बेसमेंट के लिए की गई खुदाई में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हुई मौत के मामले का सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटा दिया गया है।शासन ने उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया है। एसआईटी में मेरठ के मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी व पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा भी शामिल हैं। यह टीम पांच दिनों के अंदर जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। ऐसी कोई घटना दोबारा न हो, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। प्राधिकरण, दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ की लापरवाही से युवराज की हुई मौत के बाद जिस तरह यूपी के शो विंडो कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर में अव्यवस्थाओं की पोल खुली, उससे लखनऊ तक तंत्र हिल गयासूत्र बताते हैं कि सीएम इससे नाराज थे कि पिता के सामने युवक डूबता रहा। एक अप्रशिक्षित डिलीवरी ब्वाय पानी में उतर गया, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त बचाव दल ने पानी में उतरना मुनासिब नहीं समझा। बेसमेंट के लिए खोदाई कर उसे खतरनाक स्थिति में छोड़ने वाले बिल्डर पर भी प्राधिकरण ने कार्रवाई नहीं की।उधर, नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर भी कमेटी गठित कर दी गई है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सतीश पाल ने महाप्रबंधक (सिविल) एके अरोड़ा से अतिशीघ्र जांच रिपोर्ट तलब की है।इसमें कहा गया है कि सिविल, एनटीसी, नियोजन विभाग के तमाम बिंदुओं की जांच की जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके। जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के निर्देश का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि स्पोर्ट्स सिटी प्रकरण अदालत में विचाराधीन है और यह भूखंड उसमें शामिल है।

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