रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत जिला अस्पताल में बैंचो की कमी घंटो खड़े रहने व जमीन में बैठने को मजबूर गर्भवती महिलाएं।
चंपावत जिला अस्पताल में बैंचो की कमी घंटो खड़े रहने व जमीन में बैठने को मजबूर गर्भवती महिलाएं।

चंपावत जिले के सबसे बड़े अस्पताल चंपावत जिला चिकित्सालय में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के दावे स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए जाते हैं । जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने के चलते मरीजों की काफी भीड़ चंपावत जिला चिकित्सालय में है। पर आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए अस्पताल जुझता नजर आ रहा है। जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग के बाहर बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां व बेंच उपलब्ध तक नहीं है। कई बेंच टूटी अवस्था में पड़े हुए हैं। जिस कारण गर्भवती महिलाओं व अन्य महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

आज गुरुवार को भी बैंचो की कमी के चलते कई गर्भवती महिलाएं घंटो खड़ी रही तो कई महिलाएं जमीन पर बैठने को मजबूर नजर आई। गर्भवती महिलाओं ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने कहा इतने बड़े अस्पताल में महिलाओं के बैठने के लिए व्यवस्था न होना काफी गंभीर मामला है। कहा बैंचो की कमी के चलते या तो उन्हें घंटो खड़ा रहना पड़ता है या जमीन पर बैठना पड़ता है। महिलाओं ने स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन से स्त्री रोग विभाग के बाहर महिलाओं के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध कराने की मांग की है। अब देखना है बेहतर सुविधाओं के दावे करने वाला स्वास्थ्य विभाग कब तक मातृशक्ति की समस्याओं का संज्ञान लेता है।

हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार लाने के लिए एक्शन मोड पर नजर आ रहे हैं। तो वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा भी चंपावत जिला अस्पताल को बेहतर सुविधा देने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। पर गर्भवती महिलाओं के बैठने के लिए पर्याप्त बैंचो का उपलब्ध न होना एक काफी गंभीर मामला है ।हालांकि समस्या ज्यादा बड़ी नहीं है पर तस्वीरे व्यवस्थाओं व लापरवाही की पोल खोलती नजर आ रही है।
